

अंडाल: सिदुली कोलियरी में अचानक पानी का तेज सैलाब आने और अत्यधिक दबाव के साथ हवा का भारी गुबार निकलने से पूरा इलाका दहल उठा। खदान के भीतर हुए जोरदार कंपन से धरती हिल गई, जिससे घबराए लोग चीखते-चिल्लाते अपने घरों से बाहर भाग निकले। दहशत इतनी अधिक थी कि कई परिवार जरूरी कपड़े और सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर दौड़ पड़े।
घटना के समय सिदुली कोलियरी के साथ-साथ आसपास की करीब 10 बंद खदानों से भी तेजी से गैस का रिसाव होने लगा। इससे आसपास की लगभग 15 हजार की आबादी में हड़कंप मच गया। हालांकि, कुछ समय बाद कंपन शांत हुआ और गैस रिसाव में कमी आने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
करोड़ों की मशीनें जलमग्न, 550 कर्मियों का भविष्य दांव पर
बताया जा रहा है कि पानी के भीषण दबाव के कारण पूरी खदान जलमग्न हो गई है। खदान के अंदर मौजूद करोड़ों रुपये मूल्य की एसडीएल, एलएचडी, यूडीएम, हॉलेज, स्विच और गेटिंग्स जैसी भारी मशीनें डूब चुकी हैं। सिदुली कोलियरी में करीब 550 श्रमिक कार्यरत हैं, जहां रोजाना औसतन 220 टन कोयले का उत्पादन होता था। फिलहाल उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है और कोलियरी के संचालन पर गंभीर संकट गहरा गया है।
प्रबंधन की लापरवाही पर भड़के श्रमिक संगठन
एटक नेता राजू राम ने घटना के लिए सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह एयर ब्लास्ट है, तो स्पष्ट है कि उत्पादन के बाद फेस में उचित सैंड स्टॉविंग (बालू भराई) नहीं की गई थी। इसके अलावा, बंद शंकरपुर ओसीपी में पानी भरे होने के बावजूद ओबी (ओवरबर्डन) डंप किया जा रहा था, जिससे बैरियर टूटने की प्रबल आशंका है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ।
पुनर्वास की मांग पर अधिकारियों का घेराव घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सिदुली कोलियरी अभिकर्ता कार्यालय का घेराव कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि इस घटना से वे लोग दहशत में हैं। प्रबंधन हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पुनर्वास की व्यवस्था करें। घेराव के कारण दिन भर अधिकारीगण कार्यालय में फंसे रहे। इधर , कोलियरी अभिकर्ता पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि खदान पूरी तरह पानी से भर गई है। उच्च क्षमता के पंप लगाकर पानी निकालने (डी-वाटरिंग) में कम से कम छह महीने का समय लगेगा।