ग्रामीणों के विरोध से रेवेन्यू शेयरिंग का काम ठप

ग्रामीणों के विरोध से रेवेन्यू शेयरिंग का काम ठप ईसीएल की भूमिका सवालों के घेरे में
ग्रामीणों के विरोध से रेवेन्यू शेयरिंग का काम ठप
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सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी को ईसीएल ने रेवेन्यू शेयरिंग में चलाने के लिए दिया है। कोलियरी के बाउंड्री बॉल के पीछे खाली जमीन पर पिलर गाड़ने पर ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि यह जमीन उनलोगों की है। इस पर बिना ग्रामीणों से बातचीत किए कैसे काम लगा दिया गया ? इसे बंद किया जाये और जेसीबी से जमीन को प्लेन किया जाये। ग्रामीणों के तेवर देखते हुए रेवेन्यू शेयरिंग के अधिकारी ने जेसीबी लगाकर जमीन को प्लेन कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भू-भाग पर पिलर लगाए जा रहे थे, वह पीढ़ियों से गांव वालों की जमीन है और उसका ईसीएल से कोई लेना-देना नहीं है।

ग्रामसभा और कानून की अनदेखी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि न तो ग्रामसभा में कोई प्रस्ताव पारित हुआ और न ही जमीन अधिग्रहण या हस्तांतरण की कोई कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। यह सीधे-सीधे भूमि अधिग्रहण कानून और पंचायती राज व्यवस्था की अनदेखी मानी जा रही है।

भरोसे का संकट

यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ईसीएल और उसके तहत चल रही योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आज बिना कागज काम शुरू हो सकता है, तो कल पूरे गांव की जमीन पर दावा किया जा सकता है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक जमीन से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज, वैध नक्शा और ग्रामसभा की सहमति सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक किसी भी अधिकारी या एजेंसी को गांव की जमीन पर कदम रखने नहीं दिया जाएगा।


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