भू-धंसान प्रभावित हरीशपुर गांव के निवासियों का फ्लैट्स में शिफ्ट होने से साफ इंकार

कहा- 'खराब क्वालिटी, हमें गांव के बदले गांव चाहिए'
भूधंसान प्रभावितों के साथ बैठक करतीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल
भूधंसान प्रभावितों के साथ बैठक करतीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल
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अंडाल : रानीगंज मास्टर प्लान के तहत भू-धंसान प्रभावित हरीशपुर गांव के पुनर्वास को लेकर पिछले 6 सालों से जारी गतिरोध खत्म नहीं हो सका है। गुरुवार को अंडाल एयरपोर्ट इलाके में धंसान प्रभावित ग्रामीणों के लिए एडीडीए निर्मित हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के कम्युनिटी हॉल में मंत्री अग्निमित्रा पॉल की अध्यक्षता में बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक बेनतीजा रही। निरीक्षण के दौरान नए फ्लैट्स की खस्ताहाल स्थिति देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने वहां शिफ्ट होने से साफ मना कर दिया। ग्रामीणों ने निर्मित फ्लैट्स की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्लैट्स में इस्तेमाल की गई सामग्री बेहद खराब है और रहने लायक नहीं हैं। ग्रामीण जीवनशैली के कारण लोग फ्लैट्स में रहने के अभ्यस्त नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन उन्हें एक खतरे से निकालकर दूसरी असुरक्षित जगह धकेल रहा है।

‘सोनपुर बाजार मॉडल’ पर मिले पुनर्वास

हरीशपुर ग्राम कमेटी के चेयरमैन शुभंकर चौधरी ने कहा, " हमारी सीधी मांग 'गांव के बदले गांव' की है। प्रभावितों को 3 कट्ठा जमीन और 'सोनपुर बाजार मॉडल' की तर्ज पर पूरी तरह विकसित गांव दिया जाए। साथ ही हरीशपुर और माधवपुर मौजा की कृषि भूमि का एक साथ अधिग्रहण हो, कारण गांव छोड़ने के बाद हम यहां आकर खेती नहीं कर पाएंगे।"

मंत्री अग्निमित्रा पॉल का हमला : 'दरवाजे-पंखे तक चोरी, जनता का पैसा बर्बाद'

ग्रामीणों का आक्रोश देखने के बाद राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पुरानी सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि निरीक्षण में आधे से ज्यादा फ्लैट्स के खिड़की-दरवाजे नदारद मिले। बिजली की वायरिंग और पंखे तक काटकर बेच दिए गए हैं। मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले 15 सालों में जनता की गाढ़ी कमाई को पूरी तरह धूल में मिला दिया गया। समाधान का आश्वासन देते हुए मंत्री ने कहा कि ईसीएल ने धंसान प्रभावित 14 अति-संवेदनशील गांवों की पहचान की है, जिसमें हरीशपुर शामिल है। ग्रामीण जमीन के बदले जमीन की मांग कर रहे हैं। ईसीएल के पास जमीन की किल्लत के कारण यह लंबी प्रक्रिया है। इन फ्लैटों को बेचकर ग्रामीणों की मांग के अनुरूप जमीन का इंतजाम करने के लिए मुख्यमंत्री और कोल इंडिया के शीर्ष नेतृत्व से बात की जाएगी।

बैठक में ये रहे मौजूद

ग्रामीणों संग हुई इस बैठक में मंत्री अग्निमित्रा पॉल के अलावा जिला अधिकारी एस. पोन्नमबलम, ईसीएल के डीटी गिरीश गोपीनाथन नायर, विधायक पार्थ घोष, काजोड़ा क्षेत्र के एएमपीसीडीआई स्वरूप कुमार दत्ता, स्थानीय बीडीओ और एडीडीए के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

अब आगे क्या ?

हरीशपुर के ग्रामीण पिछले 6 सालों से भू-धंसान की दहशत में जी रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा फ्लैट्स को खारिज किए जाने के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी 'गांव के बदले गांव' की मांग और खस्ताहाल प्रोजेक्ट के सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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