शक्तिमण्डप में श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव पर भावविभोर हुए श्रद्धालु

कथावाचन करते श्री प्रकाशानंद जी महाराज
कथावाचन करते श्री प्रकाशानंद जी महाराज
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धनंजय, सन्मार्ग संवाददाता

जामुड़िया : हटिया स्थित शिव मंदिर प्रांगण के शक्तिमंडप में इन दिनों कथावाचक श्री प्रकाशानंद जी के मुखारविंद से संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार की देर शाम कथा के दौरान भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह का मनोहारी प्रसंग प्रस्तुत किया गया। विवाह प्रसंग के संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन से पूरा शक्तिमंडप भक्तिरस में डूब गया और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा वाचक श्री प्रकाशानंद जी ने श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में, अनेक पराक्रमी राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को उठाने और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने जब शिवधनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया तो धनुष भंग हो गया। इसके साथ ही मिथिला नगरी में आनंद की लहर दौड़ गई और माता सीता ने भगवान श्रीराम को अपना पति स्वीकार किया।

कथा के दौरान श्रीराम-जानकी विवाह की झांकी, मंगल गीत एवं भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालु विवाह प्रसंग के दौरान जय श्रीराम और सियावर रामचंद्र की जय के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान करते रहे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शक्तिमंडप में स्वयं मिथिला नगरी का दिव्य विवाह समारोह साकार हो उठा हो।

कथावाचक ने कहा कि श्रीराम और माता जानकी का विवाह केवल एक दांपत्य संबंध नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा, समर्पण, प्रेम और धर्म के आदर्शों का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने मर्यादा का पालन करते हुए

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