शिक्षा व प्रशासन पर राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ किया गया प्रदर्शन

निलंबन, झूठे मुकदमे ,भ्रष्टाचार और भय का माहौल बनाने वाले पर कार्रवाई की मांग
डीएम को ज्ञापन सौंपते संगठन के पदाधिकारी
डीएम को ज्ञापन सौंपते संगठन के पदाधिकारी
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आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले में शिक्षा विभाग, प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर विषयों को लेकर मंगलवार को संग्रामी यौथ मंच की जिला कमेटी की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष जमकर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी एस पोन्नमबलम को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के सदस्यों ने इस तरह के मामले की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उक्त मामलों के कारण व्यापक संख्या में कर्मचारियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उत्पीड़न, भय और अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल प्रबंधन समितियों में शिक्षक प्रभारी और शिक्षक प्रतिनिधियों के माध्यम से राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के आरोप भी लगाए गए। संगठन के सदस्यों का कहना है कि बाहरी नेताओं के सहयोग से चुनावों में हस्तक्षेप कर महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा किया गया, जिस कारण विद्यालयों में भय, भेदभाव के साथ राजनीतिक माहौल बनाया गया।

निलंबन पर उठाया सवाल

संगठन के जिला संयोजक भास्कर घोष ने कहा कि कांकसा ब्लॉक कार्यालय के कर्मचारी शुभंकर बनर्जी को बीते 28 अगस्त 2024 को आरजी कर की घटना के विरोध में नवान्न चलो आंदोलन में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि हाईकोर्ट की टिप्पणी के बावजूद उन्हें 6 दिनों तक जेल में रखा गया। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। कोर्ट की पुर्नबहाली के निर्देश के बावजूद अब तक उसे लागू नहीं किया गया। इस कारण उनका परिवार मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर झूठे मामले

संगठन के अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि आईसीडीएस पांडवेश्वर में कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाने पर कई कर्मियों पर झूठे मामले दर्ज कराये गये। शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के सदस्यों पर हमला किया गया। शिकायत के बाद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

प्रधान शिक्षक के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

संगठन की ओर से बेनाचिति भारतीय उच्चतर आरटीआई स्कूल के प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र प्रसाद को बिना कारण बताओ नोटिस और आरोप पत्र के निलंबित किए जाने का विरोध किया गया। आरोप है कि उनके समर्थकों ने मिड-डे-मील मामलों में दबाव, धमकी और झूठे आरोप लगाने की बात कही। उनके आवास पर कथित तौर पर हमला और विद्यालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों के संचालन करने का भी आरोप लगाया गया।

शिक्षक कलिमूल हक पर भ्रष्टाचार का झूठा आरोप

शिक्षक कलिमूल हक के खिलाफ भ्रष्टाचार, राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग, शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार तथा विद्यार्थियों से अवैध शुल्क वसूली और मिड- डे-मील योजनाओं में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगाये गये। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। संगठन के सदस्यों का कहना है कि तृणमूल शासनकाल में व्यापक संख्या में कर्मचारियों व शिक्षकों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें निलंबित किया गया और एक स्थान से दूसरे स्थान पर कई का तबादला कर परेशान किया गया। भाजपा सरकार में लोग न्याय की आस कर रहे हैं।

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