'कल्ला सेंट्रल अस्पताल का निजीकरण बर्दाश्त नहीं'

सीटू की ओर से धरना प्रदर्शन कर सौंपा गया ज्ञापन
'कल्ला सेंट्रल अस्पताल का निजीकरण बर्दाश्त नहीं'
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आसनसोल : ईसीएल सेंट्रल अस्पताल कल्ला में बेहतर इलाज नहीं होने व निजीकरण के खिलाफ बुधवार की सुबह सीटू ट्रेड यूनियन की ओर से अस्पताल परिसर स्थित कैंटीन के समीप धरना प्रदर्शन किया गया। इसके बाद सीटू के प्रतिनिधियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. फैयाज अहमद को ज्ञापन सौंपा। ऑल इंडिया कोल वकर्स यूनियन के अध्यक्ष सह कोल इंडिया के सुरक्षा बोर्ड के सदस्य जीके श्रीवास्तव ने कहा कि ईसीएल के तहत विभागीय सेंट्रल अस्पताल, डिस्पेंसरी और एरिया अस्पतालों की स्थिति चिकित्सा सेवा समाप्त होने की ओर बढ़ रही है। सभी जगहों पर चिकित्सक, नर्सिग कर्मी, टेक्निशियन तथा आधुनिक मशीनों की कमी है। अगर कुछ आधुनिक मशीनें है भी तो उसका संचालन करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कल्ला सेंट्रल अस्पताल का 1952 में जगजीवन राम ने उद्घाटन किया था। उसके बाद से यहां काफी बेहतर चिकित्सा सेवा कर्मियों को मिल रही थी, लेकिन धीरे -धीरे सब कुछ बिगड़ता चला गया। ईसीएल कर्मियों को पैसे देकर बेहतर इलाज के लिए रेफर कराने पड़ते हैं। चिकित्सा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कल्ला सेंट्रल अस्पताल का निजीकरण करने की साजिश की जा रही है। सुना जा रहा है कि कल्ला अस्पताल का अपोलो के साथ टैब किया जाएगा। सीटू सहित अन्य कई यूनियन द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। निजी अस्पताल का काम इलाज कम और व्यवसाय का विकास करना अधिक है। आजकल स्वास्थ्य साथी कार्ड धारकों जैसी स्थिति ईसीएल कर्मियों को झेलनी पड़ रही है। स्वास्थ्य कर्मियों की छंटनी के साथ रोगी को भर्ती करने के दौरान बेड उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाया जाएगा। इस कारण यूनियन इसका विरोध कर रहा है। मौके पर महासचिव मनोज दत्ता, आयोजक सचिव गौरांग चटर्जी, विनोद सिंह, सुजीत भट्टाचार्य, प्रदीप मुखर्जी सहित सीटू के कई सदस्य व व्यापक संख्या में यूनियन से जुड़े कर्मी उपस्थित थे।

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