फर्जी बैंक लोन कॉल सेंटर का पर्दाफाश

डायरेक्टर समेत 7 लोग हिरासत में
बरामद सीम व अन्य दस्तावेज
बरामद सीम व अन्य दस्तावेज
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संजय, सन्मार्ग संवाददाता

बर्दवान : जामताड़ा गैंग की तर्ज पर कॉल सेंटर की आड़ में लोन देने के नाम पर निजी जानकारी चुराकर आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का बर्दवान थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कॉल सेंटर से लगभग 5,000 फोन नंबरों का डेटाबेस, 12 सिम कार्ड, 1 लैपटॉप, 4 डेस्कटॉप, 8 मोबाइल और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके साथ ही कई युवक-युवतियों को हिरासत में लिया गया है। यह घटना बर्दवान शहर के तिनकोनिया बस स्टैंड के पास गुड्स शेड रोड इलाके की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां एक इमारत की दूसरी मंजिल पर फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के पोर्टल से पुलिस को जानकारी मिली कि इस लोकेशन से लोगों को लोन देने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जा रही है। गिरोह राज्य के कई जिलों के लोगों को फोन करके उनके दस्तावेज हासिल करता था। कॉल सेंटर का रूप देने के लिए कई युवक-युवतियों को नौकरी पर रखा गया था। ऑफिस में ट्रेनिंग रूम, कॉल डेस्क, किचन और डायरेक्टर रूम तक बनाया गया था। आम लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बाहर एक साइनबोर्ड लगाया गया था, जिस पर लिखा था ''विभिन्न बैंकों से लोन दिलाया जाता है।'' पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए स्मार्टफोन की जगह कीपैड फोन का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में पता चला कि ये सिम कार्ड किसी ट्रस्ट के नाम पर खरीदे गए थे।

ठगी का तरीका:

पहले महिला कर्मचारी ग्राहकों को फोन करके लोन का लालच देती थीं। विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सएप पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर कार्ड मंगवाए जाते थे।इसके बाद क्यूआर कोड (QR Code) भेजकर ''प्रोसेसिंग फीस'' के नाम पर 370 रुपये मांगे जाते थे। एक बार पैसे भेजने के बाद ग्राहकों से प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर 5 से 6 हजार रुपये तक ठग लिए जाते थे। पैसे पाने के लिए हर दिन नया स्कैनर बदला जाता था। अलग-अलग जिलों से शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और बर्दवान स्थित इस ठिकाने पर छापेमारी की। पुलिस ने गिरोह के सरगना और संस्था के डायरेक्टर अरीत कुमार दास, रिमी दास और 5 महिला कर्मचारियों समेत कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया है। हालांकि, संस्था के डायरेक्टर अरीत कुमार दास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को बैंक लोन एजेंट बताया है, लेकिन वे ट्रस्ट के नाम पर इस्तेमाल हो रहे सिम कार्ड का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस धोखाधड़ी का शिकार कितने लोग हुए हैं और इसमें कौन-कौन शामिल है।

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