संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के 17 अभियुक्त गिरफ्तार

33.79 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की धोखाधड़ी व हेराफेरी का मामला
संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के 17 अभियुक्त गिरफ्तार
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आसनसोल : फर्जी तरीके से शहर के आम नागरिकों का इनपुट प्राप्त कर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करने से संबंधित मामले में आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अपनी छानबीन की प्रक्रिया जारी रखते हुए 17 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वाले अभियुक्तों में राहुल वर्मन, अशोक प्रसाद, अरिंदम सेन, नितिन साव, मोहम्मद अकरम, शुभम कुमार सिंह, श्याम सुंदर शाह, हिमांशु दुबे, अमित कुमार राय, अरिंदम सिन्हा, रोनिक दे सरकार, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, राम भरोशा भगत, मोहम्मद वाहिद अली, सुकुमार प्रधान, शेख सोहेल तथा मोहम्मद जासिम खान शामिल हैं। उन्हें शुक्रवार को आसनसोल जिला अदालत के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने उक्त कांड को अंजाम देने वाले कुछ अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी समेत अपनी विशेष छानबीन करने का हवाला देते हुए उन्हें पुलिस रिमांड पर लेने की अपील अदालत से की। अदालत ने अभियुक्तों की जमानत अर्जी रद्दकर उन्हें 3 दिनों की रिमांड पर पुलिस के साथ भेज दिया। बता दें कि उक्त मामले में पहले भी 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। फिलहाल वे सभी भी रिमांड पर ही हैं।

आखिर क्या था पूरा मामला ?

बताया जाता है कि एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस की ओर से आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के भीतर एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के संकेत पाए गए थे, जिसमें कुछ लोग साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने और उसे सुगम बनाने में परस्पर जुड़ी अपनी सक्रिय भूमिका निभाते थे। बताया जाता है कि यह नेटवर्क प्रतिरूपण और धोखे के माध्यम से पीड़ितों से फर्जी कॉल करता था तथा गलत तरीके से ग्राहक के विवरणों का उपयोग करके पीओएस एजेंटों के माध्यम से सिम कार्ड प्राप्त करता था, जबकि धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त कर उसे स्थानांतरित करने और छिपाने के लिए फर्जी बैंक खाते बनाकर उसे संचालित भी किया करते थे। वहीं मोबाइल नंबर, आईएमईआई, बैंक लेनदेन, एटीएम से निकासी व अन्य तकनीकी इनपुट के प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि उक्त कांड में शामिल व्यक्तियों की गतिविधियों के माध्यम से 33.79 करोड़ रुपये से अधिक की राशि धोखाधड़ी से हेराफेरी की गई है। हालांकि जांच के दौरान यह भी पता चला कि एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर साइबर अपराध का संचालन एक संदिग्ध द्वारा किया जा रहा था। बता दें कि यह मामला तमिलनाडु और कन्याकुमारी जिले के पीड़ितों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से भी संबंधित है। समन्वय पोर्टल पर प्रतिबिंब मानचित्र के विश्लेषण के दौरान, उक्त मोबाइल नंबर को संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया था। इसके बाद, उक्त मोबाइल नंबर के मालिक रोहन पंडित को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं पुलिस के स्तर से उससे गहन पूछताछ की गई। हालांकि पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर अपनी संलिप्तता स्वीकार की और खुलासा किया कि उसके बंधन बैंक खाते में धोखाधड़ी से कुछ रुपये जमा किए गए थे तथा उसने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए कमीशन के रूप में कुछ राशि प्राप्त की थी। फिलहाल उक्त मामले को लेकर पुलिस की छानबीन लगातार जारी है।

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