रेशमी ग्रुप की कोयला परियोजना के उद्घाटन के दूसरे दिन ही पुनर्वास की मांग पर भड़के ग्रामीण

कुआरडीह में ईसीएल क्वार्टरों से परिवारों को हटाने के विरोध में प्रदर्शन, जेसीबी समेत परियोजना का काम रुकवाया; बातचीत के बाद शांत हुआ मामला
रेशमी प्रबंधन से बात करते ग्रामवासी
रेशमी प्रबंधन से बात करते ग्रामवासी News
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जामुड़िया : ईसीएल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड और रेशमी ग्रुप की संयुक्त कोयला परियोजना के भूमि पूजन के दूसरे ही दिन पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा। शनिवार को कुआरडीह में ईसीएल क्वार्टरों में रह रहे परिवारों को हटाने के विरोध में पश्चिम बंगाल बाउरी समाज शिक्षा समिति और कुआरडीह ग्राम रक्षा कमेटी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने जेसीबी समेत परियोजना का काम रुकवा दिया। बाद में प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच बातचीत के बाद स्थिति शांत हुई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवार पिछले 70 से 80 वर्षों से ईसीएल क्वार्टरों में रह रहे हैं। ऐसे में बिना उचित मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था किए उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि परिवारों के रहने और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ना चाहिए। इस मुद्दे पर पहले भी कई बार आंदोलन हो चुके हैं।

बाउरी समाज के नेता एवं ग्रामीण प्रतिनिधि सुमंत बाउरी ने कहा कि प्रभावित परिवारों के मुआवजे के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को उनका वाजिब हक दिलाने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है।

विधायक के बयान पर बाउरी समाज का पलटवार

गौरतलब है कि 25 अक्टूबर को परियोजना का भूमि पूजन हुआ था, जिसमें जामुड़िया के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी उपस्थित थे। विधायक ने कहा था कि अवैध कब्जे के आधार पर मुआवजे की मांग उचित नहीं है, हालांकि मानवीय आधार पर मदद का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने तृणमूल शासनकाल में पैसे देकर क्वार्टरों में बसने का आरोप भी लगाया था।

इसके जवाब में सुमंत बाउरी ने कहा कि संबंधित परिवार लंबे समय से यहां रह रहे हैं। उन्हें राजनीतिक विवाद में घसीटने के बजाय पुनर्वास और अधिकारों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

परियोजना प्रमुख प्रमोद कुमार द्विवेदी ने ग्रामीणों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखने का भरोसा दिया। फिलहाल मामला शांत है, लेकिन पुनर्वास और मुआवजे पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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