

जामुड़िया : दुर्गापूजा नजदीक आने के बावजूद वेतन और बोनस का भुगतान नहीं होने से नाराज सीटू समर्थित श्रमिकों ने जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र के शेखपुर स्थित क्लस्टर इस्पात कारखाने में प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया। श्रमिकों का आरोप है कि पूजा में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, लेकिन कारखाना प्रबंधन की ओर से अभी तक न तो वेतन का भुगतान किया गया है और न ही बोनस दिया गया है। इससे श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने त्योहार की तैयारियों को लेकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने कहा कि दुर्गापूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दौरान प्रत्येक परिवार को कपड़े, राशन, बच्चों की जरूरतों और अन्य घरेलू खर्चों के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है। ऐसे में समय पर वेतन और बोनस नहीं मिलना श्रमिकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है। श्रमिकों ने यह भी चिंता जताई कि दुर्गापूजा के दौरान बैंक बंद रहने के कारण भुगतान में और देरी होने पर उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इस संबंध में माकपा के युवा नेता बुद्धदेव रजक ने श्रमिकों के पक्ष में आवाज उठाते हुए कहा कि “श्रमिक किसी पर एहसान नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपने परिश्रम का उचित मेहनताना और नियमानुसार मिलने वाले बोनस की मांग कर रहे हैं। जिन श्रमिकों के खून-पसीने से कारखाने का उत्पादन चलता है, उन्हीं श्रमिकों को दुर्गापूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से पहले वेतन और बोनस के लिए आंदोलन करने को मजबूर होना पड़े, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने कहा कि त्योहार के समय श्रमिकों को आर्थिक परेशानी में डालना उनके परिवारों की खुशियों पर भी असर डालता है। प्रबंधन को श्रमिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए अविलंब बकाया वेतन और बोनस का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों की मेहनत का सम्मान होना चाहिए और उनके अधिकारों के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
बुद्धदेव रजक ने प्रबंधन से मांग की कि श्रमिकों की समस्याओं का तत्काल समाधान करते हुए दुर्गापूजा से पहले वेतन और बोनस का भुगतान किया जाए, ताकि श्रमिक अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक त्योहार मना सकें। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों की प्राप्ति के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
श्रमिकों ने भी स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं होने पर उनकी परेशानियां और बढ़ेंगी। अब देखना है कि कारखाना प्रबंधन श्रमिकों की मांगों पर कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करता है।