

जामुड़िया : विधानसभा क्षेत्र के कवितीर्थ चुरुलिया स्थित चुरुलिया तारा माइंस में रोजगार, शुद्ध पेयजल और पुनर्वास सहित विभिन्न मांगों को लेकर चुरुलिया, देशेरमोहन, लोदा समेत आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों ने उत्पादन पूरी तरह बंद करा दिया है। उत्पादन बंद होने का प्रतिकूल प्रभाव माइंस की परिवहन सेवा पर भी पड़ा है, जिससे वहां परिवहन कार्य भी ठप हो गया है।
उल्लेखनीय है कि चुरुलिया सहित आसपास के दर्जनों गांवों के 500 से अधिक परिवारों के लोगों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हस्ताक्षरयुक्त मांगपत्र पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी को सौंपा था। ग्रामीणों ने मांगपत्र के माध्यम से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। इसी क्रम में अब नाराज ग्रामीणों ने चुरुलिया तारा माइंस का उत्पादन बंद कराकर अपना विरोध जताया है।
ग्रामीणों की मांगों और पुनर्वास के मुद्दे को लेकर पिछले वर्ष पीडीसीएल की ओर से दो प्राथमिक विद्यालयों, एक आंगनबाड़ी केंद्र, चुरुलिया पुलिस आउटपोस्ट और हाटतला को अन्यत्र स्थानांतरित कर ग्रामीणों के पुनर्वास की बात कही गई थी। इस मुद्दे पर तत्कालीन विधायक हरेराम सिंह ने भी ग्रामीणों और पीडीसीएल के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की थी। हालांकि, उस बैठक में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया था।
इसके बाद वर्तमान सरकार के भाजपा विधायक डॉ. बिजन कुमार मुखर्जी ने भी पीडीसीएल के अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठक कर समस्याओं के समाधान की पहल की थी। इसके बावजूद ग्रामीणों की मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
लगातार आश्वासनों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब तारा माइंस में उत्पादन पूरी तरह बंद हो जाने से माइंस के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि जल्द ही ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो इस आंदोलन का असर आगे भी जारी रह सकता है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जामुड़िया के विधायक और पीडीसीएल के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।