

सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। ईसीएल के फंक्शनल डायरेक्टर्स की अधिकार प्राप्त समिति ने वर्ष 2025 की 34वीं बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सामान्य ओवरटाइम (OT) और रविवार की वर्किंग व्यवस्था को तर्कसंगत एवं विनियमित करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला वित्तीय समझदारी, पारदर्शिता और प्रभावी शासन (गुड गवर्नेंस) को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। लंबे समय से ओटी और रविवार कार्य को लेकर बढ़ते खर्च, असंतुलित तैनाती और प्रशासनिक जटिलताओं पर चर्चा हो रही थी। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अब इस व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
खर्च पर लगेगी लगाम व्यवस्था होगी पारदर्शी
अधिकार प्राप्त समिति का मानना है कि अनियंत्रित ओवरटाइम और रविवार कार्य से न केवल कंपनी के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, बल्कि कार्यबल की दक्षता और नियोजन पर भी असर पड़ता है। नए निर्णय के तहत ओटी और रविवार वर्किंग की तैनाती अब वास्तविक आवश्यकता, कार्य की अनिवार्यता और स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
प्रबंधन में सुधार की कवायद
यह निर्णय ईसीएल में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण, लागत प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे अनावश्यक व्यय में कमी आएगी और कंपनी की समग्र उत्पादकता व जवाबदेही बढ़ेगी। प्रबंधन का मानना है कि इस कदम से अनावश्यक ओवरटाइम और रविवार कार्य से होने वाले अतिरिक्त खर्च पर अंकुश लगेगा। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यह फैसला कंपनी में वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रबंधन ने साफ किया है कि यह आदेश कंपनी की सभी इकाइयों, क्षेत्रों और कार्यालयों में समान रूप से लागू होगा। किसी भी तरह की ढिलाई या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। इस फैसले के बाद ईसीएल की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, वहीं कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों की निगाहें इसके क्रियान्वयन और आगे के असर पर टिकी हुई हैं।
कर्मचारी संगठनों की रहेगी नजर
हालांकि इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर भी सबकी नजर टिकी है। आने वाले दिनों में ओटी और रविवार वर्किंग को लेकर जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देश ईसीएल की कार्यसंस्कृति में अहम बदलाव ला सकते है।