

सांकतोड़िया : चिनाकुड़ी तीन नंबर डीपीएस मोड़ के समीप स्थित गुरुद्वारा प्रांगण में रविवार को सिख समुदाय द्वारा वीरता और भाईचारे का प्रतीक पर्व होला-मोहल्ला श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। हजूरी रागी दरबार साहिब अमृतसर भाई साहब ईश्वर सिंह, प्रचारक ज्ञानी बेअंत सिंह कलगीधर गुरुद्वारा साहिब लुधियाना वाले, हजूरी रागी हरजीत सिंह तख्त श्री पटना साहेब ने गुरुवाणी से भक्त प्रहलादजी की ईश्वर भक्ति और खालसे की होली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने होला-मोहल्ला के आध्यात्मिक पहलुओं को विस्तार से समझाया। श्रद्धालुओं ने गुरु घर में मत्था टेककर सुख - समृद्धि और शांति की कामना की। साथ ही लंगर का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सोहन सिंह और सचिव गुरविंदर सिंह ने बताया कि होला-मोहल्ला सिख समुदाय का एक ऐतिहासिक पर्व है, जिसकी शुरुआत सिख के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1701 में की थी। यह पर्व सिखों में वीरता, साहस और अनुशासन की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि सिख समुदाय अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को जीवित रखता है। यह पर्व होली के अगले दिन मनाया जाता है और इसका उद्देश्य सिख समुदाय में साहस, अनुशासन और सामुदायिक एकता की भावना को मजबूत करना है।
भाईचारे का पर्व होला-मोहल्ला - रतन
समाजसेवी रतन मसीह ने कहा कि सिख समुदाय का वीरता, साहस और भाईचारे का प्रतीक पर्व होला-मोहल्ला पर्व है। उन्होंने बताया कि होला-मोहल्ला केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि साहस, सेवा और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाला उत्सव है। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा आरंभ किया गया यह उत्सव आज भी सिखों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह पर्व न केवल सिख समुदाय, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए एकता, साहस और सेवा का संदेश देता है। यह पर्व क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजाए गए, जहां गुरुवाणी का पाठ, कीर्तन और अरदास का आयोजन किया गया। मौके पर नगर निगम के उपमेयर अभिजीत घटक, क्षेत्रीय महाप्रबंधक जितेंद्र प्रसाद सिंह, दीदार सिंह, काबुल सिंह, प्रीतम सिंह, सोना सिंह, परमजीत सिंह, जसवंत सिंह, गुरदीप सिंह, गुरमीत सिंह, सुरजीत सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।