

पांडवेश्वर : पांडवेश्वर थाना अंतर्गत हरिपुर स्थित सरकारी विद्यालय प्रांगण में अचानक हुए भू-धंसान से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। विद्यालय परिसर में मिड-डे-मील रसोईघर के ठीक पास जमीन धंसने से एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया। गनीमत रही कि घटना के समय छात्र-छात्राएं उस हिस्से से दूर थे, जिससे एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया। वर्तमान में इस विद्यालय में 528 विद्यार्थी नामांकित हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खनन क्षेत्र होने के कारण भूगर्भ का हिस्सा अंदर से खोखला हो चुका है। मानसूनी बारिश के कारण मिट्टी बैठ रही है। करीब तीन साल पहले भी इसी स्कूल परिसर में जमीन धंसी थी। उस समय ईसीएल के केंदा एरिया प्रबंधन ने स्कूल को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने और नए भवन के निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह वादा फाइलों में ही दबा रह गया।
प्रशासन और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद प्रबंधन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बार-बार हो रहे भू-धंसान के बावजूद क्या क्षेत्र का कोई जियो-टेक्निकल सर्वे या ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) परीक्षण कराया गया ? अत्यधिक संवेदनशील और खनन प्रभावित क्षेत्र होने के बाद भी इसे अब तक आधिकारिक तौर पर ''रेड/डेंजर जोन'' घोषित क्यों नहीं किया गया? वर्ष 2023 से 2026 के बीच तीन साल का समय बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व सुरक्षित भवन का इंतजाम क्यों नहीं हुआ ?
अभिभावकों ने रोकी बच्चों की पढ़ाई, आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद से क्षेत्र में आतंक का माहौल है। कई अभिभावकों ने अनहोनी की आशंका के चलते अपने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इंकार कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए स्कूल को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।