सियार के काटने से मौत मामले में राज्य सरकार ने दिया मुआवजा

लोमड़ी का प्रतीक फोट
लोमड़ी का प्रतीक फोट
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सन्मार्ग संवाददाता

पुरुलिया: रघुनाथपुर-सांथालडीही औद्योगिक क्षेत्र या बाघमुंडी-झालदा के जंगलों के किनारे ही इनका निवास है। रोज़ाना मुश्किलों से लड़ना पड़ता है। दुर्गम इलाका, पीने का पानी, खाना—हर चीज़ की समस्या और ऊपर से जंगली जानवरों का डर। सबसे ज़्यादा डर सियार (फॉक्स/जैकॉल) का है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इनका जीवन सियारों के साथ ही कट रहा है। सूरज ढलते ही इन्हें रास्ते पर निकलने में डर लगता है, क्योंकि सड़क पर तब किसी और का कब्ज़ा होता है। अंधेरा होते ही सियारों की "हुक्का-हुआ" की आवाज़ें गूंजने लगती हैं। रास्ते पर निकलते ही सियार पीछा करते हैं और अगर कोई मुकाबला करे, तो काट लेते हैं या पंजे मार देते हैं! स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक साल से पुरुलिया की सीमा से लगे झारखंड से ''बंगाल फॉक्स'' घुस रहे हैं। ​पश्चिम बंगाल में पहली बार सियार के काटने से हुई मौत के मामले में राज्य सरकार 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और नौकरी दे रही है। 24 सितंबर 2025 को पुरुलिया के झालदा वन क्षेत्र में सियार के काटने से इचाग की रहने वाली प्रमीला रजक की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार की मदद करने की पहल की गई है। गुरुवार को पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो मृतक के पति दिलीप रजक को राज्य सरकार का 5 लाख रुपये का मुआवजा चेक सौंपेंगे। इसके साथ ही, मृतक के बेटे जितेंद्र रजक को झालदा वन क्षेत्र में ही 12,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर ''फॉरेस्ट वॉलंटियर'' के पद पर नौकरी दी जा रही है। ​पिछले एक साल में पुरुलिया वन विभाग के झालदा, कोटशिला, बाघमुंडी और कंसाबती उत्तर वन विभाग के रघुनाथपुर, काशीपुर क्षेत्रों में मिलाकर 100 से ज़्यादा लोग सियारों के हमले और काटने से घायल हुए हैं, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग की ओर से इस नौकरी की औपचारिक घोषणा की जाएगी। प्रशासनिक हलकों का मानना है कि राज्य वन विभाग के इतिहास में यह एक अप्रत्याशित और अभूतपूर्व घटना है।

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