सेल-आईएसपी में पहली बार 24 सितंबर को होगा मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव

इंटक ने उप मुख्य श्रमायुक्त पर लगाया पक्षपात का आरोप
सेल-आईएसपी में पहली बार 24 सितंबर को होगा मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव
Published on

सूरज, सन्मार्ग संवाददाता

बर्नपुर : सेल-आईएसपी, बर्नपुर इन दिनों कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में है। इसमें मुख्य रूप से 24 सितंबर को होने वाला मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव, स्थायी कर्मियों का 39 माह का बकाया एरियर, एचआरए और ठेका श्रमिकों को केंद्रीय न्यूनतम वेतन देने का विषय शामिल है। इसी को लेकर आसनसोल आयरन एंड स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक) ने उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय), आसनसोल पर एक यूनियन विशेष (BMS)के पक्ष में काम करने और पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया है। यूनियन के अध्यक्ष हरजीत सिंह ,अजय राय सहित अन्य सदस्य ने बैठक कर कहा कि इंटक और बीएमएस समेत अन्य यूनियनों ने पत्र के माध्यम से मुद्दा उठाया था कि आईएसपी के ठेका श्रमिकों को न तो पश्चिम बंगाल का वर्तमान न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही केंद्रीय वेतन।

इंटक ने गिनाई पक्षपात की 3 घटनाएं

हरजीत सिंह ने बताया कि 27 अगस्त को उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) द्वारा बैठक बुलाकर घोषणा की गई कि आईएसपी में मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव 24 सितंबर को होगा, जिस पर सभी यूनियनों ने सहमति जताई। आरोप है कि उसी दिन अलग से बीएमएस को बुलाकर ठेका श्रमिकों के विषय पर गुप्त बैठक की गई। दूसरी घटना 4 सितंबर की है आईएसपी प्रबंधन ने शनिवार की हाफ-डे ड्यूटी खत्म कर फुल-डे ड्यूटी लागू करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव का विरोध सबसे पहले इंटक ने लिखित रूप से दर्ज कराया था। नियमानुसार पहली बैठक इंटक के साथ होनी चाहिए थी, लेकिन सीएलसी ने बीएमएस के साथ बैठक कर ली। यूनियन का कहना है कि चुनाव की घोषणा के बाद किसी एक यूनियन के साथ इस तरह बैठक करना आचार संहिता का उल्लंघन है और इससे चुनाव प्रभावित हो सकता है। विरोध दर्ज कराने पर 7 सितंबर को सीएलसी ने इंटक को बैठक के लिए बुलाया। 8 हजार ठेका श्रमिकों के वेतन पर विवाद बैठक में इंटक ने दावा किया कि आईएसपी में कार्यरत करीब 8,000 से अधिक ठेका श्रमिकों को केंद्रीय न्यूनतम वेतन से वंचित रखा जा रहा है। यह मामला इंटक ने 27 जुलाई 2026 को ही उठाया था। इंटक का कहना है कि पहले राज्य सरकार की दर से भुगतान होता था, अब निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए लागू केंद्रीय दर मिलनी चाहिए। वहीं प्रबंधन का तर्क है कि स्टील/मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए कोई विशिष्ट केंद्रीय न्यूनतम वेतन अधिसूचित नहीं है, यह केवल कंस्ट्रक्शन, सिक्योरिटी और सैनिटरी के लिए है। ऐसे में प्लांट के बाहर के करीब 300 कर्मियों को ही लाभ मिलेगा और प्लांट के अंदर के 8 हजार कर्मी वंचित रह जाएंगे। हरजीत सिंह ने कहा कि इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। केंद्रीय वेज सभी ठेका कर्मियों का हक है। जब तक इस पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक राज्य सरकार का बढ़ा हुआ वर्तमान वेज दिया जाए। इंटक ने यह भी आरोप लगाया कि जब पूछा गया कि अभी कौन सा वेज दिया जा रहा है, तो प्रबंधन और सीएलसी ने सवाल एक-दूसरे पर टाल दिया। यूनियन ने आगे कहा कि प्रबंधन एडिशनल वेलफेयर अलाउंस (AWA) जो एनजेसीएस का मामला है, उसे बंद करने के लिए सीएमओ कोलकाता को प्रस्ताव भेज रहा है। 240 दिन काम करने वाले ठेका कर्मियों को ग्रेच्युटी का हक भी नहीं दिया जा रहा। जबकि सेल की भद्रावती और माइंस में केंद्रीय वेज और AWA दिया जा रहा है तो बर्नपुर में क्यों नहीं? इसे लेकर इंटक सीएलसी (दिल्ली) और केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखेगी।

चुनाव को लेकर इस्पात नगरी में माहौल गर्म

24 सितंबर को होने वाले चुनाव में कुल 3522 वोटर 7 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वोटिंग का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक है और उसी दिन 7 बजे से काउंटिंग कर नतीजा घोषित हो जाएगी। वहीं चुनाव को लेकर कर्मचारियों का कहना है कि इसमें कोई भी राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए पर देखा जा रहा है कि कुछ राजनीतिक नेता अपनी रोटी सेकने में लगे हुए है।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in