संकट से उभरकर रिकॉर्ड की ओर दौड़ी ईसीएल

51.269 मिलियन टन किया उत्पादन
ईसीएल मुख्यालय
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सांकतोड़िया : विषम परिस्थितियों से जूझ रही ईसीएल ने अब जबरदस्त वापसी करते हुए उत्पादन के मोर्चे पर नया इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिया है। कंपनी के सीएमडी और सभी निदेशकों की आक्रामक रणनीति, सतत मॉनिटरिंग और टीमवर्क का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। तीन दिनों में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है ईसीएल। वित्तीय वर्ष के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी ईसीएल का कुल कोयला उत्पादन 51.269 मिलियन टन तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि अभी भी तीन दिन का समय बाकी है, जिससे यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि कंपनी न सिर्फ अपना वार्षिक लक्ष्य हासिल करेगी, बल्कि पिछले वर्ष के उत्पादन रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगी।

प्रबंधन की रणनीति ने बदली तस्वीर

बीते महीनों में ईसीएल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था चाहे वह उत्पादन में गिरावट हो या परिचालन संबंधी बाधाएं, लेकिन सीएमडी सतीश झा के नेतृत्व में निदेशक मंडल ने जमीनी स्तर पर सख्त फैसले लिए। खदानों में उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई। मशीनरी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया गया। श्रमिकों के साथ बेहतर तालमेल बनाया गया। नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग को तेज किया गया। इन सभी प्रयासों ने मिलकर कंपनी को संकट से बाहर निकालते हुए रिकवरी मोड से ग्रोथ मोड में ला खड़ा किया है।

रिकॉर्ड तोड़ने की पूरी तैयारी

ईसीएल के मौजूदा आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि अगर अंतिम तीन दिनों में यही रफ्तार बनी रही, तो कंपनी एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकती है। उत्पादन के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी यह भी दिखाती है कि कंपनी अब स्थिरता की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के बाद ईसीएल की स्थिति कोल इंडिया की प्रमुख उत्पादक कंपनियों में और मजबूत होगी। यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी के लिए, बल्कि पूरे कोयला क्षेत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।

ईसीएल का कर्ज घटा, बढ़ा भरोसा

प्रबंधन का कहना है ईसीएल ने आर्थिक मोर्चे पर भी शानदार वापसी करते हुए महज चार महीनों में बड़ा बदलाव कर दिखाया है। कभी 3200 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दबी कंपनी ने तेज रफ्तार रिकवरी करते हुए अब तक 2200 करोड़ रुपये चुका दिए हैं, जिससे बकाया कर्ज घटकर लगभग 1000 करोड़ रुपये रह गया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब कंपनी उत्पादन और परिचालन चुनौतियों से जूझ रही थी। वहीं यदि समय रहते यह वित्तीय सुधार नहीं होता, तो ईसीएल की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।

मैनेजमेंट की सख्ती और रणनीति का असर

कंपनी के सीएमडी और निदेशक मंडल ने वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया,अनावश्यक खर्चों में कटौती की, राजस्व बढ़ाने पर फोकस किया। उत्पादन और डिस्पैच में तेजी लाई गई। इन कदमों के चलते ईसीएल ने न केवल अपने कर्ज को तेजी से कम किया, बल्कि कंपनी को वित्तीय स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाया।

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