'आसनसोल में प्रारंभ हुई वर्षों से बंद बस्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में दैनिक पूजा'

भाजपा की ऐतिहासिक जीत का आसनसोल में दिखा पहला असर
पूजा करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पूजा करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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आसनसोल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आते ही पूरे बंगाल के साथ पश्चिम बर्दवान जिला में खुशी की लहर देखी जा रही है। इस जीत का जिला में व्यापक असर दिखने लगा है। आसनसोल में इसका पहले असर के रूप में वर्षों से बस्तिन बाजार स्थित श्रीश्री दुर्गा माता चेरिटेबल ट्रस्ट मंदिर में बंद दैनिक पूजा प्रारंभ कर दी गयी। जीत के बाद ही सोमवार रात को कुछ श्रद्धालुओं ने मंदिर में जाकर मंदिर का मुख्य दरवाजा खोलकर पूजा - अर्चना प्रारंभ की। वहीं मंगलवार सुबह को पुन: विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी। गौरतलब है कि वर्ष 2011 से मां दुर्गा के मंदिर में दैनिक पूजा बंद करवा दी गयी थी। भक्त दैनिक पूजा के लिए इसके खुलने का इंतजार करते थे। वहीं श्री-श्री दुर्गा माता चैरिटेबल ट्रस्ट के ऐतिहासिक मंदिर के द्वार करीब 15 साल बाद भक्तों के लिए स्थायी रूप से खोल दिए गए हैं।

मंदिर का खुलना वादे का प्रतिफल है

श्रीश्री दुर्गा माता चेरिटेबल ट्रस्ट मंदिर का खुलना उस वादे का प्रतिफल है जो चुनाव प्रचार के दौरान आसनसोल उत्तर से भाजपा प्रत्याशी कृष्णेंदु मुखर्जी ने किया था। उन्होंने चुनाव के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा मां दुर्गा के मंदिर को खोलने का किया था। उन्होंने कहा था कि जीत मिलने पर मंदिर को साल के 365 दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जायेगा, जिसका नतीजा आज जनता देख रही है। बता दें कि इसी मंदिर का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी आसनसोल में अपने भाषण में किया था।

स्थानीय निवासियों के लिए रहा ऐतिहासिक क्षण

कई वर्षों से बंद मां दुर्गा मंदिर का पट खुलते ही मंगलवार सुबह से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। इस एतिहासिक क्षण को देखने के लिए मंदिर में भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई थी। मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही सबसे पहले पूरे परिसर की भव्य तरीके से साफ-सफाई की गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की।

क्या कहा स्थानीय लोगों ने

स्थानीय निवासी संजय अग्रवाल सहित अन्य लोगों ने कहा कि 2011 से पहले यह मंदिर चालू था, जहां दैनिक पूजा-पाठ की जाती थी। उन्होंने कहा कि जब 2011 में तृणमूल की सरकार आयी तो तृणमूल के नेताओं एवं प्रशासन के दबाव में आकर पूजा बंद करा दी गयी कारण उन्हें कहा गया था कि अगर पूजा होगी तो यहां खून-खराबा हो सकता है। उस समय से यह मंदिर बंद रहता और सिर्फ दुर्गापूजा, काली पूजा एवं लक्ष्मी पूजा के समय ही इस मंदिर का गेट खोलने के लिए बाध्य किया गया था। वहीं जनता के आक्रोश ने दिखा दिया कि उसमें कितनी ताकत होती है और वर्षों का इंतजार एवं संयम ने कमल खिलाकर मंदिर को खुलवाया।

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