

जितेन्द्र, सन्मार्ग संवाददाता
सांकतोड़िया : केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने देश की औद्योगिक और सामरिक संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बल के प्रशासनिक एवं परिचालन कमांड ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी अब उनके भौगोलिक क्षेत्र के बजाय संबंधित उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप निर्धारित की जा रही है। इस पुनर्गठन का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता बढ़ाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी को मजबूत करना है।
कोयला उद्योग की सुरक्षा पर विशेष जोर
पुनर्गठन के तहत कोयला क्षेत्र से जुड़ी सीआईएसएफ की 22 इकाइयों को रांची स्थित पूर्वी सेक्टर के महानिरीक्षक के प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया है। इस व्यवस्था में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की संबंधित सुरक्षा इकाइयां शामिल हैं।
इस्पात और बिजली क्षेत्र को भी अलग कमान
नई व्यवस्था के तहत इस्पात क्षेत्र की 27 सीआईएसएफ इकाइयों का प्रशासनिक नियंत्रण भिलाई स्थित केंद्रीय सेक्टर के महानिरीक्षक को सौंपा गया है। वहीं, बिजली क्षेत्र की लगभग 54 इकाइयों की जिम्मेदारी कोलकाता स्थित नॉर्थ ईस्ट सेक्टर के संबंधित महानिरीक्षक के अधीन की गई है। अब तक सीआईएसएफ की कई इकाइयों का प्रशासनिक नियंत्रण मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर निर्धारित होता था। इस व्यवस्था में एक ही सेक्टर के अधिकारी अलग-अलग प्रकृति के औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां संभालते थे।
सीआईएसएफ का मानना है कि इस तरह के पुनर्गठन से सुरक्षा संचालन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, मानक संचालन प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा और संबंधित मंत्रालयों तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय मजबूत होगा।
ईसीएल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव
ईसीएल के लिए यह पुनर्गठन विशेष महत्व रखता है। कंपनी के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में औद्योगिक सुरक्षा के साथ-साथ कोयला चोरी और अवैध खनन पर नियंत्रण भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कोयला सेक्टर की इकाइयों को एकीकृत प्रशासनिक कमांड के अंतर्गत लाने से सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतर-इकाई समन्वय को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा ।