

बांकुड़ा : बांकुड़ा जिले में मतदाता सूची प्रकाशित होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिले में भाजपा के एक कद्दावर नेता का नाम मतदाता सूची से काटे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने संबंधित बीडीओ कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला ?
हाल ही में प्रकाशित वोटर लिस्ट के अनुसार, बांकुड़ा जिले में 3,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। आंकड़ों की मानें तो ड्राफ्ट और फाइनल लिस्ट को मिलाकर जिले में अब तक कुल 1 लाख 35 हजार मतदाताओं के नाम काटे जा चुके हैं। ताजा विवाद बांकुड़ा ब्लॉक नंबर-1 के अंतर्गत जगदल्ला गांव निवासी राकेश चट्टराज को लेकर है। राकेश चट्टराज भाजपा के मंडल नंबर-4 के उपाध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि उनका परिवार पीढ़ियों से इसी गांव में रह रहा है। नई सूची में उनके माता-पिता का नाम तो शामिल है, लेकिन उनके नाम के आगे 'डिलीटेड' (हटाया गया) लिखा हुआ है।
भाजपा नेता के आरोप
राकेश चट्टराज ने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन SIR प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकार के अधिकारियों के पास थी। चूंकि वह भाजपा से जुड़े हैं, इसलिए सत्ताधारी दल के दबाव में अधिकारियों ने जान-बुझकर उनका नाम सूची से हटाया है। उन्होंने सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज पेश किए थे, फिर भी उनका नाम क्यों काटा गया, यह समझ से परे है।
तृणमूल कांग्रेस ने कसा तंज
दूसरी ओर बांकुड़ा ब्लॉक-1 तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अंशुमान बनर्जी ने कहा कि SIR का पूरा प्रबंधन चुनाव आयोग के अधीन होता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर उन्हें (भाजपा नेता) कोई शिकायत है तो वे चुनाव आयोग के पास जाएं, ब्लॉक कार्यालय में धरना देने का क्या मतलब है।"