उत्तराखंड में बर्फीला तूफान, बांकुड़ा के 5 ट्रेकर्स समेत 8 लापता

गंगोत्री से केदारताल ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा, परिवारों में कोहराम
चिंतित परिवार व ग्रामीण
चिंतित परिवार व ग्रामीण
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संजय सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा:

नेपाल की बाढ़ की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि उत्तराखंड के बर्फीले तूफान (ब्लिज़ार्ड) ने बांकुड़ा जिले में मातम और बेचैनी का माहौल पैदा कर दिया है। उत्तराखंड में ट्रेकिंग पर गया एक 12 सदस्यीय दल भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में आ गया है। इस हादसे में दल के 8 सदस्य लापता हो गए हैं, जिनमें अकेले बांकुड़ा जिले के 5 युवक शामिल हैं। घटना के बाद से लापता युवकों के गांवों में कोहराम मच गया है।

गंगोत्री से केदारताल के लिए निकले थे ट्रेकर्स

जानकारी के मुताबिक, लापता हुए ट्रेकर्स में तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल और उदय घोष शामिल हैं, जो बांकुड़ा के शालबनी गांव के रहने वाले हैं। वहीं, पांचवें युवक मनोज खावास बांकुड़ा के केशरा गांव के निवासी हैं। दल के बाकी 3 लापता सदस्यों में 2 उत्तर प्रदेश के लखनऊ और 1 उत्तराखंड के उत्तरकाशी के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

परिजनों के अनुसार, यह 12 सदस्यीय दल (जिसमें शेरपा और सहायक भी शामिल थे) उत्तराखंड के गंगोत्री से केदारताल के लिए ट्रेकिंग पर निकला था। सभी निर्धारित समय पर गंगोत्री बेस कैंप से रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर अचानक आए भीषण बर्फीले तूफान में यह दल फंस गया।

"कहा था- नेटवर्क नहीं मिलेगा, चिंता मत करना"

लापता युवक रिंटू मंडल के चाचा कार्तिक मंडल ने नम आंखों से बताया, "28 अक्टूबर की रात उसने फोन कर कहा था कि वे गंगोत्री घूमने आए हैं और वहां से केदारताल के लिए निकलेंगे। उसने यह भी कहा था कि आगे नेटवर्क नहीं रहेगा इसलिए फोन नहीं लगेगा, चिंता मत करना। इसके बाद से ही उससे संपर्क टूट गया।"

वहीं, रतन घोष के पिता भोलानाथ घोष ने दर्द बयां करते हुए कहा, "लक्ष्मी पूजा के अगले दिन बेटे ने फोन करके बताया था कि वे घूमने जा रहे हैं। बेटा यहां-वहां छिटपुट काम करता है। लड़कों ने हमें यह तक नहीं बताया था कि वे असल में कहां जा रहे हैं।"

4 लोग किसी तरह सुरक्षित लौटे, 30 अक्टूबर को मिली सूचना

सूत्रों के मुताबिक, दल के साथ गए शेरपा और सहायकों समेत कुल 4 लोग किसी तरह जान बचाकर 30 अक्टूबर को सुरक्षित नीचे पहुंचने में कामयाब रहे। इन्हीं लोगों ने बेस कैंप पहुंचकर बाकी 8 सदस्यों के बर्फीले तूफान में लापता होने की जानकारी दी।

घटना की सूचना मिलते ही उत्तराखंड प्रशासन हरकत में आ गया है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के हेलीकॉप्टरों की मदद से राज्य की एसडीआरएफ (SDRF) टीम पिछले दो दिनों से हिमालय के उस दुर्गम क्षेत्र में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है, लेकिन खराब मौसम और ऊंचाई के कारण अब तक लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

जिला प्रशासन ने दिया मदद का भरोसा

शालबनी और केशरा गांव में मातम पसरा हुआ है। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, लापता युवकों के परिवारों की धड़कनें और चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। इस बीच, बांकुड़ा जिला अधिकारी अनीश दास गुप्ता ने कहा कि घटना को लेकर उत्तराखंड सरकार से लगातार संपर्क रखा जा रहा है। प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ है।

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