

संजय सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा: दलमा के जंगलों से आने वाले हाथियों के उत्पात और जान-माल के नुकसान से फसलों की रक्षा के लिए बेलियातोड़ थाना अंतर्गत रामकानाली गांव में शुरू हुई ‘गजलक्ष्मी पूजा’ आज भी अपनी पूरी भव्यता के साथ जीवित है। करीब 128 वर्ष पहले ग्रामीणों द्वारा शुरू की गई यह अनूठी परंपरा आस्था और लोक-संस्कृति का प्रतीक बन चुकी है। कोजागरी पूर्णिमा के पावन पर्व पर आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में केवल रामकानाली ही नहीं, बल्कि आसपास के 15 से 20 गांवों के श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचते है।