सहकारिता समिति का प्रबंधक गिरफ्तार

लाखों रुपये के गबन, भ्रष्टाचार का आरोप
अभियुक्त को अदालत ले जाती पुलिस
अभियुक्त को अदालत ले जाती पुलिस
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संजय, सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा: कोतुलपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली रामडीहा-चोरकोला-आश्विनकोटा ग्राम सेवा सहकारिता कृषि उन्नयन समिति लिमिटेड में हुए लाखों रुपये के बड़े गबन और भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस ने समिति के प्रबंधक शुभेंदु दत्ता को गिरफ्तार किया है। कोतुलपुर थाना पुलिस ने अभियुक्त को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद विष्णुपुर अदालत में पेश किया, जहां से उसे आगे की न्यायिक कार्रवाई के लिए भेजा गया। समिति के सदस्यों द्वारा लंबे समय से प्रबंधक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, आरोपी प्रबंधक शुभेंदु दत्ता पर वर्ष 2023 में सहकारिता समिति के 98 लाख रुपये का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप है। समिति के नाम पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय कोल्ड स्टोरेज के निर्माण के लिए 14 कट्ठा जमीन खरीदी गई थी। आरोप है कि यह जमीन बाजार दर से कई गुना अधिक दाम पर खरीदी गई, जबकि स्थानीय जानकारों के अनुसार उस भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य महज 2 लाख 10 हजार रुपये के आसपास है।

इसके अलावा, समिति के नाम पर रजिस्टर्ड तीन ट्रैक्टरों का निजी कार्यों में धड़ल्ले से इस्तेमाल करने और रासायनिक उर्वरकों की बिक्री को जानबूझकर बाधित करने के भी आरोप हैं। सदस्यों का यह भी आरोप है कि पिछली सरकार(तृणमूल कांग्रेस शासनकाल) के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक संरक्षण के बल पर प्रबंधक ने अकूत संपत्ति अर्जित की और विरोध करने वालों को लगातार धमकियां दी जाती थीं।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, 11 अक्टूबर को समिति के सदस्य स्वरूप पाल द्वारा कोतुलपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। इसके आधार पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), 336(3), 338, 340(2) और 351(2) के तहत मामले दर्ज किए हैं।

भ्रष्टाचार की होगी निष्पक्ष जांच: मंत्री

राज्य के सहकारिता राज्य मंत्री दिवाकर घरामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य की जितनी भी सहकारिता समितियों में इस तरह के भ्रष्टाचार हुए हैं, उन सभी की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। एक भी भ्रष्टाचारी जेल जाने से नहीं बचेंगे। मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती शासनकाल में सहकारिता समितियों को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया गया था और उनके सुचारु संचालन के लिए चुनाव तक आयोजित नहीं होने दिए जाते थे।

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