

संजय सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा:
चक्रवात 'अर्णव' के प्रभाव ने कोतुलपुर ब्लॉक में किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धान की फसल पकने के बिल्कुल अंतिम चरण में हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में लहलहाती फसल को पूरी तरह ज़मीन पर गिरा दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद से इलाके के किसानों के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
बांकुड़ा जिले में आमतौर पर अमन धान की खेती थोड़ी देर से होती है, लेकिन कोतुलपुर ब्लॉक राज्य का एक प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्र है। यही वजह है कि यहां किसान समय बचाने के लिए धान की रोपाई थोड़ी पहले कर देते हैं। नतीजतन, इस ब्लॉक के अधिकांश खेतों में धान पूरी तरह पककर तैयार हो चुका था। ठीक इसी नाज़ुक और अहम समय में 'अर्णव' का असर किसानों के लिए किसी बड़े आफत से कम साबित नहीं हुआ।
हवा के थपेड़ों ने बिछाए बीघे-के-बीघे खेत
चक्रवात 'अर्णव' के असर से पिछले तीन दिनों से कोतुलपुर ब्लॉक में हल्की बारिश के साथ-साथ दिशाहीन तेज हवाएं लगातार चल रही हैं। बारिश से भले ही तात्कालिक नुकसान कम हुआ हो, लेकिन इन तेज हवाओं ने किसानों की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। ब्लॉक के कई इलाकों में बीघे-के-बीघे खेतों में लहलहाती अमन धान की फसल ज़मीन पर बिछ गई है।
कर्ज लेकर की थी खेती, अब आलू की फसल पर भी संकट
भारी-भरकम कर्ज लेकर धान की खेती करने वाले अन्नदाता इस भारी नुकसान से गहरे सदमे में हैं। स्थानीय किसान सहदेव दे ने कहा कि धान के इस तरह ज़मीन पर गिर जाने से न केवल कुल पैदावार में भारी गिरावट आएगी, बल्कि पानी और नमी के कारण उत्पादित धान में खाली या खराब दानों (फूंक/भुसी) की मात्रा भी काफी बढ़ जाएगी।
मोहन सांतरा, देवदास नंदी व अन्य किसानों का कहना है कि उनलोगों ने कर्ज लेकर खेती की थी। धान की फसल बर्बाद होने से उनके पास पूंजी का भारी अभाव हो जाएगा, जिसका सीधा और विपरीत असर आने वाले दिनों में उनकी मुख्य फसल यानी 'आलू की खेती' पर भी पड़ेगा।
इस विकट परिस्थिति में कोतुलपुर के प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल सुध लेने की मांग की है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर आर्थिक सहायता और उचित मुआवजे की गुहार लगाई है ताकि वे इस बड़े नुकसान से उबर सकें।