सीएल जामबाद ओसीपी में फ्यूल टैंकर हटाने के प्रयास पर बीएमएस ने किया बवाल

निजीकरण की साजिश रचने का आरोप
प्रदर्शन करते बीएमएस समर्थक
प्रदर्शन करते बीएमएस समर्थक
Published on: 

अंडाल : ईसीएल के केंदा एरिया अंतर्गत सीएल जामबाद ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) में भारी मशीनरी और फ्यूल टैंक को गुपचुप तरीके से अन्यत्र स्थानांतरित करने की कवायद पर बवाल मच गया है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के नेतृत्व में श्रमिकों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कार्यालय व खदान परिसर में जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन ने सीधा आरोप लगाया कि प्रबंधन विभागीय खदान में कृत्रिम संकट पैदा कर इसे निजी ऑपरेटर के हवाले करने का ताना-बाना बुन रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रबंधन की ओर से खदान से ईंधन की टंकी दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी। इसकी भनक लगते ही सतर्क कामगार एकजुट होकर मौके पर पहुंच गए और कड़ा प्रतिरोध जताया, जिस कारण प्रबंधन को कदम पीछे खींचने पड़े।

प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से दागे तीन अहम सवाल: प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब खदान में संसाधन और मैनपावर पूरी तरह उपलब्ध हैं, तो पिछले तीन माह से उत्पादन की अनुमति क्यों रोकी गई? चालू ओसीपी से जरूरी उपकरण और फ्यूल टैंक हटाने की आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी है? क्या उत्पादन को जानबूझकर ठप दिखाकर खदान को किसी निजी कंपनी को सौंपने की पटकथा लिखी जा रही है?

बीएमएस नेता विश्वनाथ गोस्वामी एवं मानस रत्न घोष ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए इस ओसीपी को 1.5 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है। मजदूर अब तक 30 हजार टन कोयले का उत्पादन कर चुके हैं, जबकि 40 हजार टन कोयला खदान में निकलने के लिए बिल्कुल तैयार है। कामगार शत-प्रतिशत क्षमता से लक्ष्य पूरा करने को तत्पर हैं, लेकिन प्रबंधन स्तर पर रोड़े अटकाए जा रहे हैं। नेताओं ने दो टूक कहा कि फ्यूल टैंक हटने से डंपर, शॉवेल और डोजर जैसे भारी वाहन ईंधन के अभाव में पूरी तरह ठप हो जाएंगे। सार्वजनिक उपक्रम की रक्षा के लिए यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

क्या कहता है प्रबंधन: मामले को लेकर ओसीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ्यूल टैंक का स्थानांतरण स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च प्रबंधन के निर्देशानुसार किया जा रहा है। उन्होंने निजीकरण के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि खदान में भारी जलभराव के चलते वर्तमान में खनन कार्य रुका हुआ है। हाई-पावर पंप लगाकर पानी निकासी का काम जारी है और जलस्तर घटते ही उत्पादन कार्य दोबारा बहाल कर दिया जाएगा।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
Follow Sanmarg on Google News