अवैध पत्थर खदान में धंसान से 3 श्रमिकों की हुई मौत

घायल श्रमिक को अस्पताल पहुंचाते पुलिस कर्मी
घायल श्रमिक को अस्पताल पहुंचाते पुलिस कर्मी
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बीरभूम : जिला के मुरारई में एक अवैध पत्थर खदान में धंसान की वजह से 3 श्रमिकों की मौत हो गई। मृतकों के नाम बाबू शेख (29), रघुनाथ साहू (38) और आमिर शेख (30) बताए गए हैं। बाबू शेख और आमिर शेख मुरारई के बनरामपुर के निवासी थे, जबकि रघुनाथ साहू पाकुड़ के महेशपुर थाना क्षेत्र के कार्तिकपुर का रहने वाला था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह नलहाटी पहाड़ी के पारसिनाला गांव के कानुपुर स्थित एक अवैध पत्थर खदान में ड्रिलिंग का काम चल रहा था। दोपहर करीब 12 बजे अचानक खदान में धंसान हो गई। सिर पर चोट लगने के कारण घायल हुए श्रमिक मनोमशो टुडू ने बताया कि उस समय खदान में कुल 14 श्रमिक काम कर रहे थे। उनमें से तीन लोग मिट्टी के नीचे दब गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घायलों में से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।

खदान के संचालन पर विवाद

उल्लेखनीय है कि कागजों पर यह खदान 2016 से बंद थी। हालांकि, घायल श्रमिक संटू माल ने दावा किया कि खदान बंद नहीं थी। मृतक रघुनाथ साहू के ममेरे भाई प्रसेनजीत साहा ने बताया कि उसके भाई रघुनाथ साहू इस खदान में ड्रिलिंग कर रहे थे। उसी समय धंसान होने से तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें उसका भाई भी शामिल हैं। हालांकि, उसे नहीं पता कि खदान संचालक किस राजनीतिक दल से जुड़ा है। फिलहाल खदान मालिक की असली पहचान सामने नहीं आई है। वहीं, खदान से जुड़े रवि खान का कहना है कि खदान 2016 से बंद है। वहां एक शेड (चाला) था, जिसके नीचे तीन श्रमिक बैठे थे। पिछली रात बारिश होने के कारण मिट्टी धंस गई और वे दब गए।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप

बीरभूम के विभिन्न पत्थर खदानों में अक्सर इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं। आरोप है कि खदान मालिक सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए बिना ही काम कराते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते हैं। हाल ही में नलहाटी के भवानंदपुर-नसीपुर खदान में भी धंसान के कारण एक श्रमिक की मौत हुई थी। सोमवार को हुई इस घटना के बाद श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी धवल जैन ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वे इसकी जांच कराएंगे।


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