बीरभूम में 193 पत्थर खदान बंदी के कगार पर

8 अक्टूबर तक NGT में वैध कागजात दिखाने का अंतिम समय
प्रतीक फोटो
प्रतीक फोटो
Published on: 

सन्मार्ग संवाददाता

बीरभूम : पर्यावरण विभाग की मंजूरी नहीं है। दिन-रात माफिया टुलू मंडल की छत्रछाया में पूरी तरह से गैर-कानूनी तरीके से बीरभूम में सैकड़ों पत्थर क्रशर और खदानें चल रही हैं। निर्देश देने के बावजूद 193 पत्थर क्रशरों ने कोई वैध कागजात नहीं दिखाए। इसलिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 8 अक्टूबर तक की अंतिम समय सीमा तय कर दी है। इस समय के भीतर वैधता का प्रमाण न देने पर बीरभूम के पचामी, रामपुरहाट, शालबादरा, नलहाटी, मुरारई इलाके के पत्थर क्रशर बंद कर दिए जाएंगे। और इस अवधि में अगर क्रशर चलाया गया तो 7,281 रुपये प्रतिदिन जुर्माना देना होगा। यानी बीरभूम में अवैध पत्थर कारोबार पर चोट पड़ने वाली है।

फरार है टुलू मंडल

फरार है बीरभूम का कुख्यात पत्थर माफिया मोहम्मद निजामुद्दीन उर्फ टुलू मंडल। पहले ही सिउड़ी जिला अदालत ने टुलू के खिलाफ वारंट जारी किया है। यहां तक कि इंटरपोल के जरिए ''रेड कॉर्नर'' नोटिस भी जारी हुआ है। जांचकर्ताओं का मानना है कि करोड़ों रुपये लेकर टुलू भारत छोड़कर भाग गया है। इस बीच बीरभूम जिले में अवैध पत्थर कारोबार का और पर्दाफाश हुआ। डेढ़ दशक से इस जिले में अवैध क्रशर, यानी पत्थर तोड़ने वाली मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं।

अधिकांश क्रशरों के पास पर्यावरण विभाग की मंजूरी नहीं

अधिकांश क्रशरों के पास पर्यावरण विभाग की मंजूरी नहीं है। NGT ने बीरभूम के 229 पत्थर क्रशरों को वैध मंजूरी दिखाने का नोटिस दिया था। कहा गया था कि 30 अप्रैल तक वैध कागजात दिखाने होंगे। अदालत के सूत्रों के अनुसार, केवल 36 पत्थर क्रशर ही अपनी वैधता का प्रमाण दे पाए हैं। बाकी 193 क्रशरों के पास कोई वैध कागजात नहीं हैं।

इन क्रशर मालिकों को 29 सितंबर से 8 अक्टूबर के बीच वैधता का प्रमाण अदालत में देना होगा। नहीं तो शारदीय उत्सव से ठीक पहले ''अवैध'' पत्थर क्रशरों को बंद कर दिया जाएगा। NGT ने ऐसा ही सख्त निर्देश दिया है। और 8 अक्टूबर तक अगर कोई मालिक क्रशर चलाता है तो उसे प्रतिदिन 7,281 रुपये जुर्माना देना होगा।

2023 से NGT में बीरभूम जिले के अवैध पत्थर क्रशरों को लेकर मामला चल रहा

बता दें कि 2023 से NGT में बीरभूम जिले के अवैध पत्थर क्रशरों को लेकर मामला चल रहा है। उस समय वैधता का प्रमाण न मिलने पर 229 पत्थर क्रशर मालिकों को डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ा था। अब 193 ''अवैध'' पत्थर क्रशर बंद होने की कगार पर हैं। डेढ़ दशक से बीरभूम के पाँचामी, शालबादरा, नलहाटी, मुरारई, तालबांध, रामपुरहाट इलाके में कम से कम 400 क्रशर हैं। इनमें से अधिकांश पूरी तरह से अवैध हैं। क्रशर में काम करने वाले मजदूर अक्सर अत्यधिक धूल के कारण सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित होते हैं। उन्हें सही इलाज या मुआवजा भी नहीं मिलता। ऐसी शिकायतें बहुत हैं। इन क्रशरों के पास की सड़कों से आना-जाना दूभर है। आसमान धूल से ढक जाता है। अत्यधिक वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी है।

अब तक ये क्रशर मालिक माफिया टुलू मंडल की छत्रछाया में थे। इसलिए टुलू मंडल के खिलाफ अवैध क्रशर चलाने की शिकायत भी दर्ज हुई है। क्रशर के साथ-साथ इस जिले में लगभग 250 अवैध पत्थर खदानें भी हैं। विशाल वन क्षेत्र काटकर पत्थर निकाला जाता है। और इन सभी मामलों में बीरभूम जिला प्रशासन उदासीन रहा। जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, NGT के निर्देश का पालन करते हुए क्रशर मालिकों को वैध कागजात दिखाने का नोटिस भेज दिया गया है। हालांकि इस समय बीरभूम में अधिकांश पत्थर खदानें बंद हैं। लेकिन झारखंड-बिहार से बड़े-बड़े डंपरों में पत्थर बीरभूम के क्रशरों में आ रहा है।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in