

आज का युग विज्ञान का युग है। इस युग में वर-वधू सभी शिक्षित होते हैं तथा दोनों
के ही अपने-अपने सिद्धान्त हैं। अपनी सोच, अपने सपने तथा अपनी-अपनी सभी की
आकांक्षाएं होती हैं। इस स्थिति में शादी के समय वर-वधू की सिर्फ जन्म कुंडली का
मिलान कर उन्हें वैवाहिक बन्धन में बांध देना उचित प्रतीत नहीं होता। जन्म कुण्डली
के बजाय अगर जीवन कुण्डली का मिलान किया जाए तो कहीं बेहतर होगा।
जीवन कुण्डली का मतलब है कि दोनों किस प्रकार का जीवन जी रहे हैं और किस तरह
का जीवन जीना चाहते हैं? वे किस बात पर समझौता कर सकते हैं और किस बात पर
समझौता करना उन्हें पसन्द नहीं है। अगर दोनों को एक-दूसरे के लाइफ स्टाइल के बारे
में जानकारी है तो उनके लिए यह तय करना आसान हो सकता है कि क्या वे आगे
चलकर एक-दूसरे के हिसाब से अपने लाइफ स्टाइल को एडजस्ट कर पायेंगे या नहीं?
अगर एडजस्ट कर भी लेंगे तो किस हद तक?कहीं ऐसा तो नहीं कि दोनों रेल की पटरी
के समान जीवन भर साथ-साथ तो चलते रहें किन्तु कभी एक न हो पायें।
सबसे पहले इस चीज का मिलान करें कि वर-वधू को सुबह देर तक सोना पसन्द है या
नहीं? अगर दोनों ही एक ही प्रवृत्ति के हैं तो शादी के बाद कभी-भी खिचखिच नहीं
होगी। अगर वर सुबह जल्दी उठने का आदी है और वधू देर से तो दोनों को मिलकर
इस आदत को सुधारने की आवश्यकता होगी।
दोनों की सुबह की शुरुआत कैसे होती है? सुबह की सैर से, घर पर व्यायाम से, अपने
गार्डन में घूमकर या अखबार के साथ चाय का प्याला लेकर? इसके बाद भोजन के
विषय में जानकारी प्राप्त करें। दोनों शुद्ध शाकाहारी भोजन पसन्द करते हैं, मांसाहारी हैं
या शाकाहारी हैं किन्तु अण्डे खाते हैं लेकिन अन्य के मांसाहार पर कोई एतराज नहीं है
आदि बातों पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए।
आपका पसंदीदा पेय क्या है? चाय, कॉफी, शर्बत, नींबू पानी, कोल्डड्रिंक्स, शराब आदि।
साथ ही खाने में कौन-कौन सी चीजें आप दोनों को समान रूप से पसन्द हैं जैसे-मिठाई,
अन्य मीठे पदार्थ, नमकीन, चाट-चटपटा, फल-मेवे, चाय, चाइनीज, कांटीनेंटल, अपना
परम्परागत खाना या जो भी मिल जाये। दोनों की समान रुचि बेहतर मानी जाएगी
अन्यथा एडजस्ट करके दोनों को अपनी-अपनी रुचियों में थोड़ा बहुत फेर-बदल करने की
क्षमता होनी चाहिए।
रेस्तरां वगैरह में खाने के विषय में आप दोनों क्या सोचते हैं? कभी-कभी खाना बुरा
नहीं है? व्यर्थ की बरबादी है, हमेशा बाहर का भोजन ही अच्छा लगता है या फिर समय
के मुताबिक घर-बाहर दोनों जगहों का भोजन किया जा सकता है आदि।
इसी प्रकार बाहर घूमने-फिरने, सैर-सपाटा, मौजमस्ती आदि के विषय में भी आपसी
जानकारियां आवश्यक हैं। बहुत ही मजबूरी हो, तभी बाहर जाना चाहिए। जब भी मौका
मिले, निकला जा सकता है, कर्ज लेकर भी मौज-मस्ती में कोई हर्ज नहीं आदि पर
विचार विमर्श अवश्य होना चाहिए।
घर की साफ-सफाई व सजावट के विषय में दोनों का क्या मानना है? जब जरूरी हो
तभी करना चाहिए, नित्य करना चाहिए, नहीं भी हो तो कोई बात नहीं या दोनों
मिलकर कर सकते हैं। इसी प्रकार आज के समय में देर रात तक जागने का चलन
होता जा रहा है। इसमें दोनों साथ निभा सकते हैं या नहीं?
टी. वी. पर अपनी पसन्द की फिल्म या सीरियल देखकर ही सोना पसन्द है, पति को
जल्दी सोना और पत्नी को देर से सोना पसन्द है या दोनों एक-दूसरे की इच्छा के
अनुसार देर तक जाग सकते हैं या नहीं आदि विषयों की जानकारियां विवाह से पूर्व हो
जानी चाहिए।
मेकअप, पढ़ना-लिखना, विपरीत लिंगी (अपोजिट सेक्स) के मित्रों के साथ मिलना-
जुलना, धार्मिक भावनाओं के प्रति दोनों की रुचि-अभिरुचि, छुट्टी के दिनों में साथ-साथ
रहने न रहने की विचारधारा, कमाये गये पैसों को खर्च करने तथा बचत करने संबंधी
विचार, संगीत से संबंधित अभिरुचि, एक-दूसरे के रिश्तेदारों के प्रति सोचने की समानता
आदि अनेक ऐसी बातें हैं जिन पर विवाह से पूर्व युवक एवं युवती दोनों को ही एक-दूसरे
के विचारों को जान लेना चाहिए।
कितने बिन्दुओं पर आप दोनों के विचार एक समान हैं, कितने बिन्दुओं पर विचार
भिन्न हैं, आप दोनों कितने बिन्दुओं पर समझौता कर सकते हैं या कितने बिन्दुओं पर
समझौता नहीं हो सकता आदि पर गंभीरतापूर्वक विचार करके ही विवाह करने वाले
दंपति आज के युग में सुखी रह सकते हैं। पूनम दिनकर(उर्वशी)