

फिल्म लव स्टोरी के एक चर्चित गाने में नायिका नायक से अपने सपनों के घर में लड़ाई वाली जगह के बारे में पूछती है, तब नायक कहता है कि उस ने तो घर में लड़ाई करने वाली कोई जगह बनाई ही नहीं है मगर हर रिश्ते में एक नएपन के लिए और उस में आकर्षण के लिए थोड़ा बहुत लड़ना झगड़ना और रूठना मनाना जरूरी है। उस पर भी जब वह रिश्ता परफेक्ट पति पत्नी का हो तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि उनकी लड़ाई परफेक्ट हो, परफेक्ट यानी संपूर्ण।
अक्सर लड़के लड़कियां शादी से पहले अपने जीवन साथी को लेकर बहुत से सपने संजोते हैं। जब उम्मीदों पर खरे उतरने वाले सपनों के परफेक्ट पति-पत्नी मिल भी जाते हैं तो चंद महीनों तक दोनों एक दूसरे की इच्छाओं और जरूरतों का खूब ध्यान रखते हैं मगर फिर धीरे-धीरे ये नियम और परफेक्शन पति-पत्नी के जीवन में नीरसता भरने लगते हैं।
इस नीरसता को दूर करने के लिए परफेक्ट पति पत्नी भी अगर अपने जीवन में हल्की-फुल्की नोक-झोंक करते रहें तो संबंधों में ताजगी बनी रहती है मगर ध्यान रहे कि यह टकरार गंभीर रूप न ले ले क्योंकि इससे आपका दांपत्य दांव पर लग सकता है, इसलिए अपने आपको परफेक्ट मानने वाले दंपति जब भी लड़ाई करें तो जीवन साथी का स्वाभिमान आहत न करें।
35 वर्षीय शीतल अपने पति जितेन्द्र के बारे में बताती हैं- जितेन्द्र समय के बड़े पाबंद हैं। अपने सामान को लेकर भी बड़े पर्टीकुलर हैं। अगर कोई चीज जगह पर न मिले तो इनका पारा हाई हो जाता है। जब मेरी शादी हुई थी तो मैं यहीं सोचती रहती थी कि अगर इनके जैसा परफेक्ट नहीं बन पाई तो क्या होगा मगर मैंने अपने आप को इनके हिसाब से ढाल लिया। इनकी एक आदत ऐसी है कि जिसे लेकर हमारे बीच अक्सर नोक-झोंक हो जाती है और वह है घर में घुसते ही टीवी चला लेने की आदत मगर दूसरे दिन याद ही नहीं रहता कि हमारी पिछली शाम को लड़ाई भी हुई थी।
इसी तरह शीतल के पति जितेन्द्र ने बताया-शीतल बहुत अच्छी बहू है, पत्नी है और मां भी मगर परफेक्ट मेकअप के चक्कर में कई बार यह इतनी देर लगा देती है कि हमारी तू-तू मैं-मैं हो जाती है पर हम लड़ाई को इतना तूल नहीं देते कि हमारा रिश्ता दांव पर लग जाए। शादी के शुरू के दिनों में बस एक बार हुआ था जब तलाक शब्द हमारे बीच आ गया मगर वह हमारा बचपना था, यह हम अब रियलाइज करते हैं, इसलिए हम लड़ते भी हैं तो रात गई बात गई वाले अंदाज में। अपनी लाइफ को लाइवली जीने के लिए ‘आओ डियर करें लड़ाई’ के रूप में हमारी लड़ाई मोल ली हुई होती है जिसमें हल्की फुल्की छेड़छाड़ और रूठना मनाना जरूर चलता है।
जरूरी नहीं कि हर पति-पत्नी की सोच शीतल और जितेन्द्र जैसी सुलझी हो। कई बार पति-पत्नी के बीच हल्की-फुल्की नोंक- झोंक के रूप उभरे झगड़े गंभीर लड़ाई का रूप ले लेते हैं। उस पर परफेक्शनिस्ट होने का जुनून उन्हें ज्यादा अहंकारी बना देता है। आप भी कहीं अपने जीवन साथी से बात-बात पर झगड़ने वाले, रोने सुबकने वाले लाइफ पार्टनर तो नहीं बनते जा रहे हैं?
अगर आप अपने जीवन साथी के काम और व्यवहार में बदलाव महसूस करते हैं या फिर मन में उसके चरित्र को लेकर शक का बीज पल रहा हो तो बजाय शक में अपने आपको परेशान करने के उस की जड़ तक पहुंच कर उसे दूर करें जैसा कि शीतांशु और श्वेता की जिंदगी में चल रहा था।
टूरिंग जाॅब करने वाली शीतांशु की पत्नी श्वेता की अचानक बढ़ी व्यावसायिक व्यस्तता ने शीतांशु के मन में उसके चरित्र को लेकर शक पैदा कर दिया था। इसका एक कारण यह था कि शीतांशु के मित्र की पत्नी काम के बहाने पुरुष मित्रों से रोमांस करती थी, इसलिए एक दिन शक से भरा शीतांशु श्वेता के आफिस जा पहुंचा। वहां उसे पता चला कि वाकई श्वेता आजकल टूर्स में व्यस्त है। इस तरह शीतांशु की समस्या जड़ से दूर हो गई। इस प्रकार दांपत्य में छा रही समस्या को ढूंढ़ कर उसे हल करने का प्रयत्न करें ताकि मन में उपजा शक का अंकुर विषबेल न बन जाए।
दाम्पत्य संबंधों में छोटी-छोटी खटपट तो चलती रहती है मगर अपने आप को संपूर्ण समझने वाले दंपति परफेक्शन में डूबे हर बात में अपने आप को सही सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं जिससे कई बार उनकी गृहस्थी बिखर भी जाती है।
अपने जीवन साथी की छोटी बातों को लेकर टोकना उस की छोटी-छोटी गलतियों को नजर अंदाज करने के बजाय उन्हें बढ़ा चढ़ा कर बात का बतंगड़ बना देना आपके दांपत्य संबंधों में दरार का कारण बन सकता है इसलिए ध्यान रहे कि छोटी-छोटी बातों को तूल देकर उन्हें दांपत्य के टूटने का कारण न बनाएं।
अक्सर लड़के- लड़कियों के दिमाग में अपने भावी जीवन साथी को लेकर एक स्वप्निल छवि अपने जीवन साथी में नहीं दिखती तो बेवजह की बहस शुरू होती है। ऐसे में हर मुद्दा बहस का कारण बन जाता है पर ऐसी बहस का नतीजा वहीं ढाक के तीन पात वाला होता है।
हर इंसान में कोई न कोई कमी जरूर होती है। दूसरे की कमियों को उजागर करने से बेहतर है कि अपनी कमियों को समझें और स्वीकारें। बहस के समय शब्दों से कहीं अधिक ताकतवर होती है मौन की भाषा क्योंकि मौन अवस्था में मैं का लोप हो जाता है।
पति-पत्नी संबंधों में थोड़ी बहुत कहा सुनी सामान्य बात है पर इस संबंध में परफेक्शन की परिभाषा किसी एक तक ही सीमित नहीं होती बल्कि एक दूसरे को समझने की इच्छा और एक दूसरे के सुखदुख में सहजानुभूति उन्हें परफेक्ट बनाती है।
एक दूसरे को समझने की काबिलियत रखने वाले दंपति परफेक्ट माने जाते हैं। ऐसे परफेक्ट दंपतियों की नोक-झोंक और तकरार कभी उनकी गृहस्थी के टूटने का कारण नहीं बनती बल्कि वे जब भी लड़ते हैं तो ‘आओ डियर करें लड़ाई’ के मूड में जो उनकी रूटीन लाइफ में नई ताजगी भर देती है।
एम.कृष्णा राव राज (उर्वशी)