जन्मदिन को यादगार कैसे बनायें?

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जन्मदिन को यादगार कैसे बनायें?सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
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हर व्यक्ति का जन्मदिन उसके जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण दिन होता है। ईश्वर की

अनुकम्पा, मां-बाप की असीम कृपा एवं पूर्व जन्म के संस्कार के कारण शास्त्रों के

अनुसार इस संसार में चौरासी लाख योनियों का चक्कर लगाते हुए मनुष्य योनि में

आने का सौभाग्य मिलता है।

पुत्र रत्न/ पुत्री रत्न के जन्म के अवसर पर उसके परिवार वाले खुशी से झूम उठते हैं।

मिठाई बांटते हैं। पुत्र रत्न/ पुत्री रत्न उल्लेख कर कार्ड छपवाते हैं। पार्टी का आयोजन

करते हैं एवं ऐसे खुशी के अवसर पर खर्चे की सीमा भूल जाते हैं।

पुत्र रत्न/ पुत्री रत्न शब्द में यह भावना काम करती है कि अब परिवार में सोना चांदी,

हीरा-मोती लाने वाला अवतरित हुआ है। वह बड़ा होकर कमायेगा। हमारा घर इस

धातु रूपी कीमती रत्नों से भर जायेगा-धन वैभव की प्राप्ति होगी-आर्थिक चिन्ता नहीं

रहेगी आदि। क्या ’रत्न शब्द‘ से हमारी समझ यही है कि पुत्र-पुत्री को कुल रत्न,

समाज रत्न, देश रत्न, भारत रत्न, साहित्य रत्न, विज्ञान रत्न या इसी तरह के रत्न

बनाने की कल्पना है।

प्रति वर्ष जन्मदिन के अवसर पर बधाइयों के फोन आते हैं एवं जन्म दिन मनाया जाता

है, पर ऐसा करने पर क्या जन्म दिन स्मरणीय बनाया जा सकता है?

जन्मदिन स्मरणीय बनाने के लिए एक छोटा सा सुझाव है-

जन्मदिन की खुशी के अवसर पर अन्य खर्चों की तरह ही खर्च समझ कर अपनी इच्छा

के अनुसार दस, बीस, पच्चीस, हजार या लाख रुपया किसी बैंक में या जहां उचित

समझें, यह रकम एक स्थायी निधि के रूप में बच्चे के नाम से जमा करा दी जाय

एवं हर जन्म दिन पर उसके ब्याज की आय की रकम उसी बच्चे के हाथों से किसी

जरूरतमंद बच्चे को कापी, किताब, स्कूल पोशाक या फीस के रूप में दिला दी जाए।

ऐसा करने पर वह बच्चा सारी उम्र भर गर्व के साथ यह कह सकेगा कि उसने अपने

जीवन में एक छात्र की पढ़ाई में मदद की है। उसे अपने हर जन्मदिन पर सहायता-

सहयोग करने पर आनन्द की अनुभूति होगी।

परिवार के बुजुर्ग सहायता-सहयोग करते हैं पर परिवार के बच्चों को उसकी जानकारी

नहीं होती, अतः उनमें सेवा भावना जागृत नहीं होती। इस प्रक्रिया से बच्चों से बच्चों

में देने की प्रवृत्ति जगेगी। बच्चे में अच्छे संस्कार पड़ेंगे एवं उसकी फिजूलखर्ची पर भी

रोक लगेगी। धीरे-धीरे उस परिवार में शिक्षा सहायता कोश बन जायेगा।

हर जन्मदिन पर इस कोश में वृद्धि की जा सकती है। जब भी जन्मदिन आयेगा-बच्चे

की मनोभावना बनेगी कि उसे दूसरे जरूरतमंद बच्चे के लिए कुछ करना है और

उसका जन्मदिन परिवार वालों के लिए भी स्मरणीय दिन बनेगा। (उर्वशी)

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