औरतों की वे बातें जो मर्द नहीं समझते

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ताने देने के लिए औरत बदनाम है लेकिन सच्चाई यह है कि ताने देना उसे अच्छा नहीं लगता। ताने वह इसलिए देती है क्योंकि मर्द सुनने में माहिर होते हैं।

कपड़े जहां तहां फेंक देने की मर्दों की आदत औरतों को पसंद नहीं। वह चाहती है कि मर्द अपनी चीजों के प्रति सजग रहें। उन्हें स्वयं साफ-सुथरा रखें।

औरत जब मर्द के परिवार की आवभगत करती है तो वह चाहती है कि मर्द इस बात को समझें कि वह सब कुछ उसी के लिए करती हैं, उसके परिवार या मित्रों के लिए नहीं।

तीज-त्योहार पर मर्द की ओर से उपहार पाना उसे अच्छा लगता है। ये उपहार व्यक्तिगत हों तो उसे ज्यादा खुशी होती है।

मर्द का घर के कामों की उपेक्षा करना उसे बहुत खलता है। जब वह यह कहती है कि घर में सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलती, तब मर्द को मान लेना चाहिए कि घरेलू काम बहुत मुश्किल होते हैं।

रसोई में अगर कोई चीज बेस्वाद बन गई हो तो उसके लिए मर्द का आपे से बाहर हो जाना औरत को पसंद नहीं। वह चाहती है कि अपनी गलती को समझने और सुधारने का उसे मौका दिया जाए।

औरत जब सज-धजकर मर्द से पूछती है कि ‘कैसी लग रही हूं‘, तब वह सुनना चाहती है कि’’ बहुत अच्छी लग रही हो।‘

कामकाजी औरत के कार्यालय की समस्याएं उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी मर्द की।

देर हो जाने पर औरत जब पूछती है कि, ‘इतनी देर क्यों हुई? आखिर तुम थे कहां‘ तब उसका मतलब होता है कि, ‘तुमने बताया क्यों नहीं कि तुम्हें देर होगी। मुझे फ्रिक हो रही थी।’

औरत अपने बनाव-शृंगार में जब अचानक परिवर्तन कर ले तो मर्द को समझ लेना चाहिए कि वह अपने वर्तमान से ऊब गई है। उसे ध्यान की जरूरत है।

औरत जब यह कहती है कि, ‘आपसे कुछ कहना चाहती हूं‘, तब उसकी बात फौरन सुनी जानी चाहिए। औरत का चुप रहना उसकी स्वीकृति नहीं होती। मर्द जब अपनी इच्छाएं उस पर आरोपित करता है तब वह विद्रोह करती है। (उर्वशी)

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