

पति-पत्नी का साथ जीवन भर का होता है और इस लम्बे सफर में अनेक बार ऐसी स्थितियां भी सामने आ जाती हैं जो ऊब पैदा कर सकती हैं। कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि एक छत के नीचे रहकर भी पति-पत्नी एक दूसरे से अनजान से लगते हैं। रोज कहा-सुनी के बीच एक चुप्पी-सी छा जाती है।जब यह महसूस होने लगे कि अब आपके रिश्ते में वह बात नहीं रह गई जो शादी के दो-तीन साल बाद तक थी तो इस बात का भान होते ही यह देखना शुरू करें कि आजकल आप एक-दूसरे के लिए कितना वक्त निकाल पाते हैं। आप स्वयं देखेंगे कि घर-ऑफिस, बच्चों की जिम्मेदारी के बीच आप एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पा रहे हैं।
अपने रिश्ते को तरोताजा करने के लिए तथा फिर से साथ-साथ समय गुजारने की कोशिश अभी से शुरू कर दें।
शादी के शुरुआती वर्षों में जहां एक-दूसरे के पास रहने के अनेक बहाने ढूंढ़ते थे, वहीं आज प्रेमपूर्वक एक चुंबन या आलिंगन के बिना कितने दिन गुजर गए ? यह बताता है कि आप दोनों के जीवन के बीच एक ऊब आ गई है। अपने रिश्ते को तरोताजा करने के लिए तथा फिर से साथ-साथ समय गुजारने की कोशिश अभी से शुरू कर दें। जब आप अपना आकलन करेंगी तो आपको यह भी पता अवश्य ही चल जायेगा कि चूक कब, कहां और कैसे होती चली गई? आपको स्वयं लगने लगेगा कि पिछले कई महीनों या सालों से आप एक-दूसरे की प्रशंसा कम करते हैं या शायद करते ही नहीं हैं। बजाय गुण देखने के एक दूसरे की कमियां निकालते हैं। प्यार से बात करने के बजाय आपकी नाक पर गुस्सा रहता है। बात-बात पर बेवजह तकरार होने लगी है। यहीं से छोटे-छोटे अनेक कारण जन्म लेने लगते हैं जो आपके रिश्ते में खटास पैदा करते रहते हैं।
यहीं से छोटे-छोटे अनेक कारण जन्म लेने लगते हैं जो आपके रिश्ते में खटास पैदा करते रहते हैं।
दाम्पत्य की बुनियाद है प्रेम। यदि वह जीवन से गायब होने लगेगा तो आपके संबंध मात्र औपचारिक होकर ही रह जायेंगे। आप खुद को टटोलें। आप पायेंगे कि अपने-अपने प्रेम का इजहार करना एक लंबे अर्से से आपने बंद कर दिया है। आप यह भी सोचने लगी हैं कि बच्चे बड़े हो रहे हैं। अब आपको यह सब करना अच्छा नहीं लगता।
ऐसा सोचकर आप भूल कर रही हैं। प्रेम करने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चे आपके प्रेम और सेक्स के बीच कहीं नहीं हैं। इस मामले में आप उम्र और बच्चे की परवाह कतई न करें। यह आपकी और आपके पति की आवश्यकताओं में शामिल है। जब भी आपको दांपत्य संबंधों के बीच पनपती दूरियों का आभास होने लगे तो उसका कारण ढूंढि़ए और उन कारणों को दूर करने का सार्थक प्रयास अविलम्ब शुरू कर दें।
यह जरूरी नहीं कि इसके लिए एक-दूसरे की बाट जोही जाए कि कौन इसकी पहल करेगा? पति या पत्नी जिस किसी को भी पहले समझ में आ जाए कि बढ़ते तनाव का कारण क्या है, उसे ही पहल करके इस समस्या को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।
दांपत्य जीवन में अहम् की भावना हमेशा कटुता को ही भरती है, अतः अहम् की भावना का सर्वथा त्याग करके एक दूसरे के प्रति प्रेम एवं उदारता की भावना को लाना चाहिए। एक दूसरे की गलती ढूंढने के बजाय खुद का आकलन करना चाहिए। जब आप खुद का आकलन कर लेंगे तो उसे ईमानदारी पूर्वक अपने लाइफ पार्टनर के साथ शेयर कर सकते हैं।
जीवन को सुखमय ढंग से बिताने के लिए यह आवश्यक है कि दाम्पत्य जीवन में तनाव व झुंझलाहट न आने दें। माता-पिता, सास-ससुर, बच्चों आदि के लिए आप समर्पित हैं यह अच्छी बात है किन्तु जीवन साथी के प्रति समर्पित रहकर ही अन्य जिम्मेदारियों को भी निभाया जा सकता है। (उर्वशी) पूनम दिनकर