उत्साह व संयम से करें शादी समारोह की तैयारी

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शादी समारोह की तैयारीAI Generated Image
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घर की महिलाएं समझदारी व सूझबूझ से शादी समारोह में कार्ययोजना तैयार कर पुरुषों की सहायता से शादी के इस बड़े काम को हंसते-खेलते निपटा सकती हैं।

घर में शादी का समारोह हो और मन में हड़बड़ाहट न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। खासकर लड़की की शादी में घर की महिलाएं ज्यादा तनाव में आ जाती हैं? वास्तव में शादी का समारोह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और सभी परिवारजन यही प्रार्थना करते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक हो जाये मगर अनुभवहीनता व तनाव के कारण शादी का समारोह थकान और चिंता छोड़ जाता है। घर की महिलाएं समझदारी व सूझबूझ से शादी समारोह में कार्ययोजना तैयार कर पुरुषों की सहायता से शादी के इस बड़े काम को हंसते-खेलते निपटा सकती हैं। अगर लड़की या लड़के की शादी की तारीख तय हो गई है तो सबसे पहले परिवारजनों की एक संयुक्त बैठक कर सम्पूर्ण विवाह समारोह की तैयारी हेतु कार्ययोजना बनाकर उसकी रूप रेखा को अंतिम रूप दे देना चाहिए।

सबसे पहले क्या करें ?

घर में सबसे पहले रंगाई-पुताई प्रारम्भ कर देनी चाहिए। इसके साथ ही बुकिंग किये जाने वाले सामान, स्थान व टेन्ट आदि को अग्रिम पैसा देकर बुक कर दिया जाना चाहिए। बारात व आगंतुक अतिथियों की संख्या को ध्यान में रखकर बड़े या छोटे होटल, बैंकेट हाल, धर्मशाला आदि बुक करवाना चाहिए। टैंट का सामान, बैण्ड, आरकेस्ट्रा, हलवाई, फोटोग्राफर व अन्य साज सज्जा के सामान को काफी पहले बुक कराने से आपको शादी के समय भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी और न ही अतिरिक्त मूल्य देना पड़ेगा। विवाह के स्थान को बुक करते समय यह सावधानी बरतनी चाहिए कि वह आवास से कितनी दूरी पर है और वहां अन्य सब जरूरी सुविधाएं हैं भी या नहीं।

घर के सामान का वर्गीकरण शादी में उपयोगिता के हिसाब से करें

महिलाओं को चाहिए कि वे पुरुषों को घर से बाहर के काम सौंप और स्वयं घर के सामान का वर्गीकरण शादी में उपयोगिता के हिसाब से करें। सामान व कपड़ों की खरीदारी शादी से 20-25 दिन पहले ही कर लेनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि मेहमान घर में बैठे हों और आप बाजार में खरीदारी करने निकल जायें। रंगाई पुताई के बाद घर का सामान तरीके से लगाना चाहिए। अनुपयोगी व कीमती सामान को सुरक्षा की दृष्टि से उचित स्थान पर रखकर ताले में बंद कर दें। केवल विवाह समारोह में उपभोग किए जाने वाले सामान ही बाहर निकालें। हलवाई का सामान पहले ही मंगवा कर एक कमरे में रख दें। गैस सिलेंडर की व्यवस्था भी समय रहते कर लेनी चाहिए।

बर्तन व क्रॉकरी

रसोई में प्रयोग के लिये अतिरिक्त बर्तन व क्रॉकरी निकाल लेने चाहिए। विवाह वाले घर में करीब 15 दिन पहले से परिचितों का आना जाना लग जाता है। उनके लिये चाय, नाश्ता, पानी व भोजन के लिये किसी की सहायता लेनी चाहिए। शहरों में कुछ महिलाएं शादी वाले घरों में खाना बनाने का काम उचित मूल्य पर करती हैं।

उत्साह बनाए रखें

महिलाओं को चाहिए कि वे उत्साह बनाए रखें और हंसी खुशी तैयारी करती रहें। शादी के दो या तीन दिन पूर्व से ही घर में हलवाई लग जाता है। उसकी सहायता के लिये घर के बडे़ बुजुर्गों का सहारा लिया जा सकता है। लड़के लड़कियों के परिवार में महिला संगीत करवाने की परम्परा होती है। यह महिला संगीत महिलाओं के लिये एक कठिन कार्य है। लड़के के परिवार में महिला संगीत शादी समारोह के बाद व लड़की के परिवार में महिला संगीत शादी समारोह से पहले करवाना उचित रहता है। ऐसा करने से महिलाएं अनावश्यक परेशानी से बच सकती हैं।

महिला संगीत में महिलाओं व युवतियों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार बुलाना चाहिए। भीड़ जुटाना बड़ी बात नहीं है लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके सम्मान की रक्षा की जाये। उन्हें आदर सत्कार के साथ समारोह में चाय नाश्ते व भोजन के बिना नहीं लौटाना चाहिए। आपकी इस अदा की वे अन्य स्थानों पर जाकर भी तारीफ करेंगी।

मेहमानों व रिश्तेदारों को ठहराने के लिये उचित व्यवस्था

शादी समारोह में बाहर से आने वाले मेहमानों व रिश्तेदारों को ठहराने के लिये उचित व्यवस्था करनी चाहिए। उनके कीमती सामान व ज्वेलरी को सुरक्षित रखवाना चाहिए। शादी के समारोह में बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों पर भी महिलाओं को ध्यान देना चाहिए क्योंकि काम में लगे बाहरी व्यक्ति मौका लगते ही सामान साफ कर देते हैं। आगंतुकों के छोटे बच्चों के लिये दूध आदि की व्यवस्था करनी चाहिए व उनके मनोरंजन करने, बातचीत करने के लिये व्यस्तता के बीच समय निकालना चाहिए।

शालीनता

महिलाओं को शादी समारोह में कम व शालीनता से बोलना चाहिए क्योंकि यह उनके व्यक्तित्व की परीक्षा है। कहीं ऐसा न हो कि चिल्लाते चिल्लाते शादी के दिन गला ही खराब हो जाये। विवाह स्थल पर जाने से पूर्व घर में उचित स्थानों पर ताले लगवाकर जाना चाहिए। सिक्योरिटी सर्विस से एक दो दिन के लिये सुरक्षाकर्मी ले लेने चाहिए। इससे आपके घर की सुरक्षा सही प्रकार होगी। शादी में जितना काम घर के बाहर होता है उतना ही घर के अंदर होता है और इस का भार महिलाओं के कंधों पर होता है। महिलाएं अपनी अक्ल व मृदु व्यवहार तथा योजना के अनुसार चल कर शादी विवाह में चार चांद लगा सकती हैं। संजीव चौधरी(उर्वशी)

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