

आधुनिक जीवनशैली ने बड़ों को तो कई रास्तों से भटका दिया है, बच्चों को भी भटकने से नहीं छोड़ा। आधुनिक बच्चे न तो दादी, नानी के पास बैठकर कोई कहानी सुनना पसंद करते हैं, न बाहर अन्य बच्चों के साथ खेलना। आधुनिक टेक्नोलॉजी ने उन्हें इस कदर जकड़ रखा है कि वे उससे छूटना भी पसंद नहीं करते।
टीवी देखना, टीवी पर गेम्स खेलना, इंटरनेट का बचपन से प्रयोग करना, आई पैड पर गाने सुनना, मैसेजिंग करना उन्हें खूब पसंद है जो उन्हें उनकी उम्र से बड़ा बनाने में मदद करता है। आज के बच्चों में एकाग्रता, अनुशासन में रहना,कुछ करने की क्षमता, दिन प्रतिदिन कम हो रही है। अगर आप चाहते हैं बच्चे अपने भविष्य में सफल हों, एकाग्रचित होकर काम करें तो उन्हें बचपन से ही कुछ बातों को सिखाना होगा।
बच्चों को बचपन से उनकी जिम्मेदारियों के बारे में समझाएं और अहसास दिलाएं कि माता-पिता की भी कुछ आशाएं हैं जो वे बच्चों से पूरी करने की आस रखते हैं। उन्हें अलग से भाषण मत दें कि उनकी क्या जिम्मेदारियां हैं। उन्हें अवसर आने पर बताते रहें ताकि उन्हें उनका ज्ञान साथ साथ मिलता रहे और उसे रूटीन में वे लागू कर सकें। बड़े बच्चे के सामने खुद उदाहरण बन कर रहें और बड़े बच्चे को अपने छोटे बहन भाई के सामने उदाहरण पेश करने को कहें, व्यवहार व अनुशासन के रूप में।
बच्चों की पढ़ाई के दौरान कुछ बातों पर ध्यान दें ताकि उन्हें पढ़ाई करते हुए बाधा न हो। टीवी की आवाज धीमी रखें, आपस में मौज मस्ती और अधिक जोर से बातें न करें, न ही हंसें जिससे उनका ध्यान डिस्टर्ब हो। बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी काम के लिए न उठाएं, न ही बार-बार उनके कमरे में जाकर उन्हें बाधा पहुंचाएं ताकि वे एकाग्र मन से पढ़ सकें।
बच्चों को होमवर्क करना बोझ लगता है। बच्चों को होमवर्क का महत्त्व बताएं। इससे उनका रिवीजन होता है और कुछ समझ न आने पर वे माता-पिता, बड़े भाई-बहन की मदद साथ-साथ ले सकते हैं। बच्चे अगर होम वर्क करने से कतराएं तो उन्हें उत्साहित करने हेतु कोई हल्का फुलका प्रलोभन रखें जैसे सुंदर काम करने पर उनकी पसंद का खाना मिलेगा, समय पर काम खत्म करने पर आधा घंटा अधिक खेलने को मिलेगा आदि ।
सीधा सीधा बच्चों को पढ़ाना बोरियत पैदा करता है। अगर उससे संबंधित कुछ उदाहरण साथ साथ देते रहेंगे तो पढ़ाई का माहौल भी थोड़ा हल्का होगा और पढ़ाई भी आसानी से समझ आएगी।
बच्चों को किस कमरे में पढ़ाई करनी है, कौन से स्थान पर बैठकर पढ़ना है निश्चित स्थान तय करें। उन्हें पढ़ाई के लिए उचित मेज कुर्सी, उनकी आयु और लंबाई के अनुसार दें। कमरे में प्रकाश की उचित व्यवस्था हो ताकि उनकी आंखों पर अधिक प्रभाव न पढ़े। पढ़ाई के कमरे का आसपास का वातावरण शांत हो। किसी भी स्थान पर बच्चे को बैठाकर होम वर्क न करने दें। कॉपी के नीचे उचित ठोस स्थान हो जिस पर कॉपी रखकर वे काम कर सकें।
बच्चों के पढ़ाई स्थल से फोन को दूर रखें ताकि बार-बार फोन से बजने वाली घंटी उनकी पढ़ाई में बाधा न डाल सके। अगर उनके साथ आप भी बैठे हैं जब वे पढ़ रहे हों तो अपने फोन से कोई मैसेज न करें, न मैसेज पढ़ें और न ही किसी मित्र, संबंधी से फोन पर बात करें। बच्चे आपको मैसेज करते, पढ़ते समय देखेंगे तो पढ़ाई से ध्यान हटेगा और बच्चे इधर उधर की बातों में भटक जाएंगे।
आत्मविश्वास को बढ़ाने हेतु हर कोई चाहता है उसके काम की तारीफ हो। इसी प्रकार बच्चों को भी तारीफ के बोल बोलते रहें, उनसे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। कभी-कभी बहुत अच्छे काम हेतु उन्हें उनकी पसंद का खाने को दें या टीवी पर उनकी पसंद का प्रोग्राम देखने के लिए कहें। बच्चे उत्साहित महसूस करेंगे।
बच्चों के साथ मिलकर उनका होमवर्क और पढ़ने का टाइम टेबल बनाएं और नजर रखें कि वे उसी अनुसार पढ़ें। अगर स्कूल से काम न मिले तो उनका होमवर्क करने का समय आधा कर दें। जनरल कुछ भी घर पर उन्हें पढ़ने लिखने को कहें या उन्हें उनकी पसंद की पुस्तक पढ़ने के लिए उत्साहित करें ताकि समय का दुरुपयोग न हो। उन्हें भविष्य की चुनौतियाें या समस्याओं हेतु उन्हें तैयार करें पर प्यार और अपनत्व के साथ ताकि वे भविष्य की चुनौतियों से घबराएं नहीं, मुकाबला करें।
बच्चों के साथ ऐसा वातावरण रखें ताकि वे आपसे कोई बात डिस्कस करते हुए हिचकें नहीं। कभी कभी बातों ही बातों में समाधान निकल आते हैं। बच्चों के स्कूल, मित्र, टीचर आदि के बारे में बातें करे और पूछें उन्हें क्या करना पसंद है। बच्चों के और नजदीक आने हेतु उनके साथ खेलें, कोई उनकी पसंद का टीवी प्रोग्राम देखें फिर उनसे उस प्रोग्राम को डिस्कस कर सकते हैं।
अगर बच्चे स्कूल जाते हैं और ट्यूशन भी तो उन टीचर्स के साथ मिलते रहें और बच्चों की तरक्की व व्यवहार के बारे में जानते रहें। टीचर के सहयोग से आप बच्चे को सही दिशा आसानी से दे सकते हैं और उनके गुण-दोषों के बारे में जान सकते हैं।
गुणों को आगे बढ़ाने में टीचर की मदद ले सकते हैं और उनकी कमियों को कैसे दूर किया जा सके, उनकी मदद ले सकते हैं। बच्चों के बौद्धिक शारीरिक और मानसिक विकास हेतु उन्हें क्या करने दिया जाए, वे आपको मार्ग दिखा सकते हैं। (उर्वशी)नीतू गुप्ता