पति-पत्नी में अच्छे संबंध ही बच्चों के लिए हितकर हैं

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पति-पत्नी में अच्छे संबंध ही बच्चों के लिए हितकर हैंAi
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परिवार का आहार-व्यवहार, क्रियाकलाप, रहन-सहन आदि बातों का बच्चों के जीवन पर काफी असर पड़ता है। बचपन का समय बच्चों की अपरिपक्वता का समय होता है। अच्छा बुरा उनके दिमाग पर अमिट प्रभाव छोड़ता है। बचपन के संस्कार किशोरावस्था में सहज देखे जाते हैं।

परिवार में जिस स्तर की बोल चाल होगी, बच्चे उसी का अनुसरण करते हैं। जहां परिवार में शांति का वातावरण होगा, वहाँ बच्चे निश्चित रूप से शांतिप्रिय होंगे क्योंकि परिवार को जीवन की प्रथम पाठशाला कहा गया है। आज के व्यस्त जीवन में हर कोई व्यस्तता की आड़ में स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं। यहां तक कि माताएं भी अपने बच्चों को नौकरानी को सौंप कर स्वतंत्र रहने की पूर्ण इच्छुक दिखाई देेती हैं।

व्यस्त जीवन की कोख से जन्मी संवादहीनता पति-पत्नी के बीच असहयोग व कड़वाहट का बीज बोती है जिसका परिणाम यह होता है कि पति-पत्नी आपस में बात-बात पर उलझ जाते हैं और उनमें आपसी सहयोग की भावना समाप्त हो जाती है।

इस माहौल में बच्चे मानसिक रूप से कुंठित हो जाते हैं तथा अपनी इच्छा व्यक्त करने और सच्ची बात बोलने से भी घबराने लगते हैं। सामान्य रूप से वह भी माता-पिता की तरह एकाकीपन का शिकार हो जाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि बच्चे का बौद्धिक विकास अवरुद्ध हो जाता है।

बच्चों को मां का मातृत्व, ममता, करुणा, दया, सेवा आदि भावना एक मां ही सही रूप में दे सकती है। कई परिवारों में देखा जाता है कि वहां महिलाओं का कोई दर्जा नहीं होता। पुरुष ही सर्वेसर्वा होते हैं। वहां बच्चे भी माता को उचित सम्मान नहीं देते। पिता के संस्कारों से ही बच्चों में अनुशासन, कर्तव्य, व्यवहार, सामाजिकता व नेतृत्व की क्षमता आदि का विकास हो पाता है।

उत्तम व्यवहार और अच्छा परिवेश ही बच्चे के निर्मल मन मस्तिष्क पर उचित प्रभाव डालता है अतः बच्चों के उचित विकास हेतु परिवार में पति-पत्नी संबंध अच्छे होना नितान्त आवश्यक है। बालक राम प्रजापति (उर्वशी)

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