कामकाजी महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी: क्या पति घरेलू कामों में बराबर का साथ दे रहे हैं?

महंगाई में पति का आर्थिक बोझ बांटती महिलाएं, पर घर के कामों में साथ नदारद; नई पीढ़ी के बेटों को बराबरी का सबक सिखाने की जरूरत
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कामकाजी पत्नी को चाहिए पति का सहयोग Ai Generated Image
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एक तरफ घर का काम, दूसरी तरफ दफ्तर का

महिलाओं के बाहर की दुनिया में कदम रखने से उसके ऊपर और अधिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है। वह पहले घर की सारी जिम्मेदारियां उठाती थी मगर अब बाहर नौकरी करने से उसके ऊपर दुगुना भार आ गया है। एक तरफ घर का काम देखो तो दूसरी तरफ दफ्तर का।

पति अभी भी अपने आपको बदल नहीं पाए हैं

वे घर से बाहर नौकरी कर रही हैं और घर के लिए पैसा अर्जन करने के लिए यानी अपने पति की जिम्मेदारियों में पूरा सहयोग दे रही हैं। पहले जमाने में पैसा कमाना सिर्फ पुरुषों का ही काम था मगर इस बढ़ती महंगाई में महिलाओं ने उनके कंधों का बोझ काफी कम कर दिया है। वे भी घर के लिए पैसा कमाती हैं जबकि उनके पति अभी भी अपने आपको बदल नहीं पाए हैं।

जब महिलाएं अपने पति का सहयोग देने के लिए घर में रहकर या घर से बाहर जाकर कमा सकती हैं तो क्या ऐसे में पति का यह फर्ज नहीं बनता कि वह अपनी बीवी को घरेलू कार्यों में सहयोग दे?

कितने पति ऐसा करते हैं?

आंकड़ों के अनुसार 70 प्रतिशत पति अपनी पत्नी को घरेलू कार्यों में बिल्कुल भी सहयोग नहीं देते यानी उनकी पत्नियां उनके गैरजिम्मेदार होने से काफी दुखी हैं लेकिन जैसा कि उनकी मजबूरी है सभी जिम्मेदारियां निभाना, वे घर बाहर सभी की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनके पति उठकर सुबह की चाय लेकर अखबार पढ़ने बैठ जाते हैं और नाश्ता करके ऑफिस निकल जाते हैं। शाम को आकर खाना खाकर सो जाते हैं, भले ही उनकी पत्नियां किलसती रहें।

20 प्रतिशत पति भूले भटके अपनी पत्नी को एक-दो काम करके आराम देते हैं जैसे सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ आना, रात को उनका होमवर्क देखना, इसी से उनकी पत्नियां खुश हो जाती हैं। कम से कम बच्चों की तो कोई जिम्मेदारी उठाते हैं वे।

खुशनसीब हैं वे महिलाएं

खुशनसीब हैं वे महिलाएं जिनके पति उन पुरुषों में आते हैं जो अपनी पत्नी को पूरी तरह सहयोग देते हैं। सुबह से शाम तक वे अपनी पत्नी की तरह ही घर में व्यस्त रह सकते हैं। पत्नी के नाश्ता बनाते समय वे बच्चों को तैयार करके स्कूल भी छोड़ आते हैं। कभी किसी काम में तो कभी किसी काम में अपनी बीवी के साथ लगे ही रहते हैं।

ऐसे ही जिंदगी खूबसूरत बन जाती है। एक-दूसरे का साथ निभाने से ही गृहस्थी खुशियों से भर जाती है । इससे बच्चों पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है यानी सब कुछ हमारे हाथ में हैं। हम अपनी जिंदगी को बेहतर और खूबसूरत खुद ही बना सकते हैं।

इस समस्या की जड़ यहां है

लेकिन कभी-कभी महिलाएं खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेती हैं। वे खुद ही घर का सारा काम पूरा करना चाहती हैं। वे नहीं चाहती कि उनके पति घर में उनके साथ लगे। यदि किसी ने उसके साथ उन्हें काम करते देख लिया तो क्या कहेगा? उनकी इस सोच के पीछे वे नहीं बल्कि उनके माता-पिता जिम्मेदार हैं जिन्होंने उन्हें यही सिखाया कि औरत को ही घर के सारे काम करने होते हैं। आदमी घर में काम करता हुआ अच्छा नहीं लगता। वह तो सिर्फ हुक्म चलाने के लिए है। औरत को उसके आगे सिर झुकाकर रहना पड़ता है। उसके लिए हर काम तैयार रखना पड़ता है।

परिवार में उन्होंने अपने पिता को भी कभी घर के कामों में हाथ बंटाते नहीं देखा होता, इससे उन पर वैसा ही असर पड़ता है। उनके लिए आदमी-औरत के बीच में बहुत बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार आदमी घर के काम नहीं करता, न ही वे इसे बदल सकती हैं। बस, इसे वे नियति मानकर खुद ही पिसती रहती हैं।

पति को भी पता चलना चाहिए कि...

अब वो जमाना नहीं रहा। यदि महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आ सकता है तो पुरुषों की जिंदगी में क्यों नहीं। अपने पतियों को अपने साथ सहयोग करने की आदत डालें। पति को भी पता चलना चाहिए कि घर के कार्यों में आपका कितना समय लगता है। उन्हें अपने कामों से

रू ब रू करायें।

  • पहले उन्हें छोटा-मोटा ऐसा काम करने को कहें जिसे वह ’ना‘ न कह सकें। एक दिन में तो परिस्थितियां बदलेंगी नहीं। धीरे-धीरे ही आपके पति में बदलाव आयेगा, इसलिए ताव में न आएं।

  • जो भी काम आपके पति करें, उन्हें करने दे। उनका मनोबल न तोड़ें बल्कि उन्हें और तारीफ करें।

  • बच्चों को लिए पानी देना आदि कामों के लिए खुद न उठें बल्कि पति से देने को कहें।

  • बच्चों का होमवर्क पति को ही चेक करने दें।

  • अपने बेटे को भी काम करना सिखायें ताकि आगे चलकर उसे अपनी गृहस्थी में कोई परेशानी न आये।

  • सब्जी लाने की जिम्मेदारी अपने पति पर ही छोड़ दें।

शिखा चौधरी (उर्वशी)

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