

त्वचा शरीर का दर्पण है। यदि शरीर में कोई गड़बड़ी है तो त्वचा में यह स्पष्ट रूप से झलकने लगती है। इस दृष्टि से झुर्रियां त्वचा की सबसे बड़ी शत्रु हैं। यद्यपि उम्र के बढ़ने के साथ-साथ चेहरे की त्वचा पर झुर्रियां पड़नी शुरू हो जाती हैं मगर यत्न करने पर इन झुर्रियों को देर तक टाला जा सकता है। इसके लिए कम उम्र से ही शरीर की त्वचा का विशेष ख्याल रखना प्रारंभ कर देना चाहिये वरना तीस-पैंतीस की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते ही वृद्धावस्था आपके शरीर पर अपनी दस्तक देने लगेगी और आपके त्वचीय तंतु और मांसपेशियां ढीली पड़ने लग जायेंगी और त्वचा पर होने वाले परिवर्तन आपकी आयु की यात्रा के हर मोड़ की कहानी सुनाने लगेंगे।
उम्र बढ़ने पर त्वचा की चिकनाई कम होने लगती है। इस कारण झुर्रियां पड़ने लगती हैं। मानसिक असंतुलन, अत्यधिक चिंता, दमित भावनाएं, ज्यादा मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम और आहार में पोषक तत्वों का अभाव ही त्वचा पर झुर्रियों के रूप में उभरता है।
जब त्वचा को अंदर से तेल नहीं मिलता तो उसमें संचित चिकनाई सूखने लगती है जिससे त्वचा नई कोशिकाएं बनाने में असमर्थ रहती है और पहले वाली कोशिकाएं और तंतु पुरानी और निर्जीव पड़ जाती हैं । फलतः उनकी कसावट और लचीलापन समाप्त होने लगता है। हर तंतु अपने में सजीव होता है और स्वतंत्रा रूप से काम करता है, अतः इन्हें अंदर से जितना पोषक तेल कम मिलेगा, उसी अनुपात में ये झुर्रियां त्वचा पर पड़ती जायेंगी।
त्वचा ही शरीर की वह जगह है जो गर्मी, सर्दी, बरसात सभी वातावरण का सीधा प्रभाव झेलती हैं। यही नहीं, शरीर के अंदर होने वाली कई बीमारियों और प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप त्वचा पर उत्पन्न होने वाली खराबियों जैसे एलर्जी, खुजली, पित्ती आदि भी त्वचा को ही झेलना पड़ता है। इस प्रकार बचपन की सुकोमल त्वचा किशोरावस्था में चिकनी और कांतिमय होती हुई लापरवाही के कारण असमय ही झुर्रियों एवं झाइयों में बदल जाती है।
बचपन में त्वचा स्वाभाविक रूप से कोमल रहती है। किशोरावस्था में हारमोनों की सक्रियता से शारीरिक ग्रंथियों पर गहरा असर पड़ता है। तैलग्रंथियां अत्यधिक सक्रिय हो जाती हैं। इससे त्वचा के रंध्र बंद हो जाते हैं, फलतः चेहरे पर मुंहासे निकल आते हैं। सही उपचार व सफाई का ध्यान रखना चाहिये।
किशोरावस्था के समय की अनेक विकास प्रक्रियाओं के बाद यह वह समय है जब त्वचा को सर्वाधिक कोमल एवं कांतिमय होना चाहिये लेकिन यही वह समय है जब आपको अपनी त्वचा के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिये।
यह वह समय है जब आपकी त्वचा लापरवाही के कारण शुष्क हो सकती है। गर्भावस्था के कारण, अत्यधिक मदिरापान के कारण, अधिक रक्तचाप के कारण व अन्य कई कारणों से गालों पर, चेहरे पर झाइयां तथा छोटी-छोटी लाल लकीरें बन जाती हैं। समय रहते अनुभवी चिकित्सक से इसका उपचार करा लेना चाहिये अन्यथा ढलती हुई उम्र में त्वचा को अधिक हानि पहुंच सकती है।
यह वह उम्र है जब बावजूद कोशिशों के आपकी त्वचा अपना सौंदर्य तथा कांति खोने लगती है। इस समय आपके चेहरे को विभिन्न प्रकार के फेस पैकों तथा एस्ट्रिन्जेन्ट लोशन की आवश्यकता होती है।
तरुणावस्था एवं अधेड़ावस्था में आपने अपनी त्वचा की चाहे जितनी देखभाल क्यों न की हो, वृद्धावस्था त्वचा पर अपनी छाप पचास वर्ष होते-होते अवश्य छोड़ने लगती है। यह वह समय है जब विशेष मालिश तथा व्यायाम की आवश्यकता होती है। इससे बहुत लाभ भी होता है।
अपने आहार में आवश्यक तत्व भरपूर लें। चिकनाई बनाए रखने के लिये भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिये। पानी खूब पीना चाहिये। सूखी त्वचा पर झुर्रियां जल्दी पड़ती हैं, इसलिये चेहरे की त्वचा को ज्यादा से ज्यादा चिकना बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिये। मानसिक तनाव से दूर रहें तथा हाजमा ठीक रखें जिससे पोषक तत्व त्वचा को पोषक तेल प्रदान कर सकें। चुस्त, सक्रिय बने रहें और व्यायाम प्रतिदिन करें ताकि शारीरिक क्रियाएं व्यवस्थित रहें। भरपूर नींद लें जिससे थके तंतुओं को पर्याप्त आराम मिलता रहे।
विटामिन ‘बी‘ से मानसिक तनावों से मुक्ति मिलती है। विटामिन ‘सी‘ तंतुओं को स्वस्थ बनाए रखता है। ये विटामिन फलों, सब्जियों और मक्खन से प्रायः मिल जाते हैं। यदि आपकी त्वचा में झुर्रियां असमय दिखने लगें तो उच्च शक्ति के विटामिन ‘बी‘ कॉम्पलेक्स कैप्सूल और अच्छा प्रोटीन प्रभावकारी होते हैं। झुर्रियां देर से पड़ें, इसके लिये सबसे आसान एवं अच्छा तरीका है प्रतिदिन रात को साबुन से मुंह धोकर जैतून या बादाम के तेल की मालिश करें। मालिश चेहरे के साथ-साथ गरदन पर भी अवश्य करनी चाहिये। मालिश करते समय हाथों को नीचे से ऊपर की ओर ले जायें।
चेहरे की चिकनाई बनाये रखने के लिए ताकि झुर्रियां न पड़ें, विटामिन ‘ई‘ का एक कैप्सूल लें। इस कैप्सूल को काटकर उसमें से दवा निकालकर थोड़ी ग्लिसरीन में मिला दें और इस लेप को हल्के-हल्के चेहरे और गर्दन पर मालिश करें। आंखों के चारों ओर भी इसे लगा दें। आधे घंटे के बाद धोकर उतारें। इससे त्वचा कस जाती है और झुर्रियां दूर हो जाती हैं।
अगर आपके चेहरे पर झुर्रियां पड़ चुकी हैं तो एक बड़े प्याज का रस निकालकर थोड़ा सा मोम और शहद मिला लें ताकि एक गाढ़ा घोल बन जाए। अब इस घोल को आंखों के चारों ओर का भाग छोड़कर चेहरे और गर्दन पर मल लें। आधे घंटे बाद खूब ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें।
उड़द की दाल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह सिल पर पीसकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगा लें। आधे घंटे बाद चेहरा धो डालें।
आंखों की कोरों में झुर्रियां सबसे पहले पड़ती हैं। इसके अलावा होंठों के कोनों में और माथे पर भी उम्र का प्रभाव सबसे पहले पड़ता है। आंखों के चारों ओर की त्वचा बहुत ही कोमल होती है। इस पर कोई भी लेप हल्के हाथों से लगाना व उतारना चाहिये। यहां झुर्रियां देर से पड़ें, इसके लिए कोई भी चिकनी क्रीम या मलाई रोज रात को मलें। सिर्फ शहद भी आंखों के चारों ओर लगाने से लाभ होता है।
आंखों के चारों ओर झुर्रियां कम करने के लिये रूई के दो फाहे संतरे के रस में भिगोकर आंखों पर 15-20 मिनट कुछ दिन सुबह के समय रखना चाहिये। आलू का रस मलने से भी आंखों के कोरों की त्वचा की झुर्रियां कुछ दिनों के प्रयोग से समाप्त हो जाती है।
त्वचा की नियमित देखभाल करने से उसमें झुर्रियां देर से पड़ती हैं परन्तु एक बार झुर्रियां पड़ जाने पर उन्हें मिटाने का प्लास्टिक सर्जरी के सिवाय कोई इलाज नहीं है पर चेहरे की झुर्रियों को प्राकृतिक उपायों और खान-पान में विशेष सावधानी बरतकर थोड़ा हल्का जरूर किया जा सकता है ताकि वे मेकअप द्वारा छुपाई जा सकें।
मीना जैन छाबड़ा(स्वास्थ्य दर्पण)