वृंदावन के ‘प्रेम मंदिर’ की थीम पर सजा भव्य दुर्गा पूजा पंडाल

भाजपा महासचिव सुनील बंसल ने पंडाल का किया उद्घाटन
भाजपा महासचिव सुनील बंसल को सम्मानित करते सांसद सौमित्र खां
भाजपा महासचिव सुनील बंसल को सम्मानित करते सांसद सौमित्र खां
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बांकुड़ा: औद्योगिक बेल्ट मेजिया के दुर्लभपुर में इस बार शारदोत्सव के अवसर पर धर्म और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। विष्णुपुर से भाजपा सांसद सौमित्र खां के मार्गदर्शन में संचालित ‘गंगाजलघाटी दुर्लभपुर मिताली संघ’ की सार्वजनिक दुर्गा पूजा अपने 32वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस बार यहां मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध ‘प्रेम मंदिर’ की तर्ज पर निर्मित भव्य पंडाल श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तृतीय तिथि की संध्या पर आयोजित एक भव्य समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने दीप प्रज्वलित कर पंडाल का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर मंत्री खुदीराम टुडू व दिवाकर घरामी समेत जिले के कई विधायक और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

‘बंगाल जैसी भव्य दुर्गा पूजा पूरे विश्व में नहीं’

भाजपा महासचिव सुनील बंसल ने पंडाल की भव्यता और कारीगरी की सराहना करते हुए कहा, " तीन साल से बंगाल की दुर्गापूजा देख रहा हूं। इतना भव्य आयोजन देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में कहीं और नहीं होता। " उन्होंने सांसद सौमित्र खां के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जिस आत्मीयता से उन्होंने क्षेत्र के जन-जन को इस उत्सव से जोड़ा है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।

दूधिया रोशनी में अलौकिक छटा बिखेर रहा पंडाल

बांकुड़ा के खातरा निवासी प्रख्यात मूर्तिकार एवं कलाकार चंदन राय के निर्देशन में इस पंडाल का निर्माण हुआ है। पंडाल की भीतरी और बाहरी सज्जा में भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की प्रेमलीला के प्रसंगों को बेहद जीवंतता के साथ उकेरा गया है। गोधूलि वेला के बाद जब बहुरंगी रोशनियां इस विशाल ढांचे पर पड़ती हैं, तो पूरा परिसर एक दिव्य एवं आध्यात्मिक आभा से जगमगा उठता है।

32 वर्षों की गौरवशाली परंपरा और कार्यकर्ताओं का समर्पण सांसद सौमित्र खां ने बताया कि 32 वर्ष पूर्व स्वर्गीय अमिय खां की प्रेरणा से इस औद्योगिक परिक्षेत्र में बड़े बजट की सार्वजनिक पूजा की नींव रखी गई थी। आज यह आयोजन संपूर्ण उत्तर बांकुड़ा के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है। उन्होंने इसका श्रेय समिति के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि सचिव कृपासिंधु खां, साधन मुखर्जी, जीटेन माजी, सजल चट्टराज, सब्यसाची खां, विश्वनाथ माजी, शांतनु खां और टुटुन गोस्वामी जैसे साथियों के अथक परिश्रम के बिना इतना विराट आयोजन संभव नहीं था।

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