भोपालः भोपाल और आसपास के इलाकों में कफ सीरप के नाम पर नशे का कारोबार करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह न सिर्फ बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाइयों की बिक्री कर रहा था, बल्कि एक्सपायर्ड सीरप को नए पैक में भरकर बाजार में खपाने की तैयारी भी कर चुका था।
जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली और हरिद्वार से कफ सीरप मंगवाते थे और भोपाल के पटेल सिटी व मुबारकपुर स्थित ठिकानों पर उसे स्टोर करते थे। यहां सीरप की बोतलों से एक्सपायरी डेट और बैच नंबर मिटा दिए जाते थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके।
गिरोह अब एक कदम आगे बढ़कर पुरानी बोतलों का सीरप नई बोतलों में भरने की तैयारी में था। इसके लिए मशीनें और ड्रम तक खरीदे जा चुके थे, जिन्हें STF ने जब्त कर लिया है।
रिफिलिंग के दौरान सीरप के दूषित होने की आशंका थी, जिससे इसे पीने वालों की जान तक जा सकती थी। खासतौर पर यह सीरप नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने एक साल में करीब 7 लाख बोतल कफ सीरप बिना किसी वैध पर्चे के बेच डालीं। ये दवाइयां मेडिकल स्टोर ही नहीं, बल्कि जनरल स्टोर और किराना दुकानों तक के जरिए ग्रामीण इलाकों में बेची जा रही थीं।
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले साल छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल जिलों में जहरीले कफ सीरप से 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न पुलिस और न ही औषधि नियंत्रण विभाग ने समय रहते सख्ती दिखाई।
मामले में मंडीदीप की ‘विंग्स लाइफ रेमेडीज’ फर्म का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया साथ ही फर्म मालिक बालकिशन को गिरफ्तार कर लिया गया। मौके पर से अवैध स्टॉक और रिफिलिंग उपकरण भी जब्त किया गया है। फिलहाल STF इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है।