सुप्रीम कोर्ट 
उत्तर प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट में यूपी गैंगस्टर अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू

राज्य सरकार ने 1986 के अधिनियम से जुड़े नियमों में संशोधन किया

नयी दिल्ली/ लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1986 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई शुरू की।

याचिकाकर्ताओं ने न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ को बताया कि 1986 का कानून मनमाना और केंद्रीय कानून के विपरीत था।याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 111 में पहले से ही गैंगस्टरों और संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान हैं और ऐसे ही प्रावधान उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 1986 के अधिनियम से जुड़े नियमों में संशोधन किया है और कुख्यात अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान अब बीएनएस में भी शामिल कर लिया गया है।

तिवारी ने कहा, यूपी का गैंगस्टर अधिनियम केंद्रीय कानून से टकराता है क्योंकि इस क्षेत्र में पहले से ही कानून मौजूद है और राज्य का कानून उस पहलू पर नियम नहीं बना सकता। पीठ ने कहा कि राज्य का कानून केंद्रीय कानून के विपरीत नहीं है और दोनों एक ही चीज हैं।

तिवारी ने दलील दी कि टकराव की कसौटी के लिए यह जरूरी नहीं है कि कानूनों में सीधा टकराव हो, बल्कि यदि किसी विषय क्षेत्र पर पहले से ही केंद्र का कानून लागू है, तो राज्य उस क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज और अधिवक्ता रुचिरा गोयल ने कहा कि टकराव का मुद्दा सुनवाई में पहली बार उठाया गया है और वे इस दलील के संबंध में जवाब दाखिल करना चाहेंगे।

गोयल ने कहा कि विभिन्न अदालतों द्वारा याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार किए जाने के बाद, उन्होंने कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। उन्होंने 1986 के कानून के संबंध में इसके टकराव वाले पहलू का अध्ययन करने और जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा।

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने तिवारी के तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून सिर्फ केंद्र के कानून से टकराता ही नहीं है, बल्कि मनमाना भी है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई मार्च में तय की और संबंधित पक्षों से अपने जवाब दाखिल करने को कहा। शीर्ष अदालत ने 29 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1986 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की।

इसने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर सिराज अहमद खान और अन्य द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा था। इसके बाद, कानून की वैधता को चुनौती देने वाली कई अन्य याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में दाखिल की गईं।

अधिवक्ता मनीष कुमार गुप्ता के माध्यम से दायर की गई मुख्य याचिका में अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिनमें संपत्ति की कुर्की और जुर्माने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

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