नदी  
उत्तर प्रदेश

दुधवा की सुहेली नदी के 100 वर्षीय बदलावों का अध्ययन

दुधवा टाइगर रिजर्व में सुहेली नदी के संरक्षण के लिए 86 लाख रुपये स्वीकृत

Santosh Sharma

लखीमपुर खीरी : दुधवा टाइगर रिजर्व में सुहेली नदी के पिछले 100 वर्षों के प्रवाह मार्ग और जल प्रवाह के तौर-तरीकों में आए बदलावों का आकलन करने के लिए विस्तृत जल-पारिस्थितिक सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य नदी में आए बदलावों का दस्तावेजीकरण करना और उसके संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के उपाय सुझाना है।

दुधवा टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक एच. राजमोहन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि सर्वेक्षण और अध्ययन के लिए 86 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। राजमोहन ने बताया कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच), रुड़की के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रविवार को सुहेली नदी का दौरा किया। प्रदीप सचान के नेतृत्व में पहुंची इस टीम ने विस्तृत अध्ययन से पहले प्रारंभिक आकलन किया।

नेपाल से निकलने वाली सुहेली नदी दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों के दक्षिणी किनारे से होकर बहती है और तिकुनिया क्षेत्र में घाघरा नदी में मिलती है। यह नदी और इससे जुड़ी जल प्रणालियां क्षेत्र के जंगलों, घास के मैदानों, आर्द्रभूमियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हाल ही में मानसून के दौरान जलकुंभी से भरी सुहेली नदी बंशीनगर के पास किनारों से बाहर बहने लगी थी। इससे दुधवा-गौरीफंटा सड़क को नुकसान पहुंचा था और कुछ दिनों तक इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी।

राजमोहन ने कहा कि जल-पारिस्थितिक सर्वेक्षण के तहत नदी के जल विज्ञान और पारिस्थितिकी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करना है, जिसमें पिछले 100 वर्षों के दौरान नदी के बहाव, जल प्रवाह और पारिस्थितिकी में आए बदलावों के साथ-साथ भविष्य में संभावित परिवर्तनों का भी आकलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अध्ययन से ऐसे उपाय सुझाने में मदद मिलेगी, जिनसे नदी की स्थिति को और खराब होने से रोका जा सके। इसमें यह भी आकलन किया जाएगा कि नदी से गाद निकालना उचित होगा या नहीं और इसका जलीय जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि अध्ययन में उपग्रह आधारित सर्वेक्षण भी शामिल होगा। उन्होंने इसे नदी की स्थिति का व्यापक वैज्ञानिक आकलन बताते हुए कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष राज्य सरकार को सौंपे जाएंगे, ताकि उनके आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सके।

राजमोहन के मुताबिक, करीब एक साल पहले नदी से गाद निकालने और अन्य कार्यों को लेकर अलग-अलग राय सामने आने तथा कानूनी कार्यवाही शुरू होने के बाद इस तरह का अध्ययन कराने पर विचार किया गया था।

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