दुबईः ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने देश के भविष्य को लेकर बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौलवियों की एक समिति को उनके स्थान पर नए नेता के चयन का काम सौंपा गया है, और उसने अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी है। 67 साल के आराफी अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
आराफी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं, जो सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करती है। वे गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं और फिलहाल ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करेगी।
एक्सपीडिएंसी काउंसिल के प्रवक्ता मोहसेन देहनवी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल ने अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम लीडरशिप काउंसिल का सदस्य चुना है।" अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी अब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और चीफ जस्टिस घोलमहुसैन मोहसेनी एजेई के साथ इस्लामिक रिपब्लिक पर शासन करते हैं। यह अधिकार पहले सिर्फ अयातुल्ला खामेनेई के पास था।
इस तरह, अराफी तकनीकी रूप से तीन सदस्यों में से एक हैं। लेकिन, एक ऐसे शासन में मौलवी होने के नाते जिसे सुप्रीम लीडर के तौर पर सिर्फ मौलवी ही लीड कर रहे हैं, वह असल में सबसे सीनियर बन जाते हैं।
ईरान के संविधान के तहत 88 सदस्यीय समिति ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (विशेषज्ञों की सभा) नये सर्वोच्च नेता का अंतरित तौर पर चयन किया है। इस निकाय में केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं, जिन्हें हर आठ वर्ष में जनमत के आधार पर चुना जाता है।
कानून के अनुसार, ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को जल्द से जल्द नये सर्वोच्च नेता का चयन करना होता है। यदि चयन में देरी होता है तो एक नेतृत्व परिषद कार्यभार संभाल सकती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और ‘गार्जियन काउंसिल’ का एक वरिष्ठ सदस्य शामिल होता है, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
उत्तराधिकार से जुड़ी चर्चाएं आमतौर पर सार्वजनिक नजरों से दूर होती हैं। इससे पहले राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी खामेनेई को उनका संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था लेकिन मई 2024 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई का नाम संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है, हालांकि उन्होंने कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला है।
वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह दूसरी बार होगा जब सर्वोच्च नेता का उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाएगा। वर्ष 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की मौत बाद खामेनेई सर्वोच्च नेता बने थे।
ईरान में सर्वोच्च नेता देश की जटिल शिया धर्मतांत्रिक व्यवस्था का सर्वोच्च पद है और उसे सभी राज्य संबंधी मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। सर्वोच्च नेता सशस्त्र बलों और ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के ‘कमांडर-इन-चीफ’ भी होता है। ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ एक अर्द्धसैनिक बल है जिसे अमेरिका ने 2019 में एक आतंकवादी संगठन घोषित किया था और खामेनेई ने अपने शासन के दौरान इसे और सशक्त बनाया।