नई दिल्लीः लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर और विवादास्पद आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक टिप्पणियों में दावा किया कि कुछ महिला नेताओं को कथित “घनिष्ठता” के आधार पर सांसद या मंत्री बनाया गया। यह विवाद तब और बढ़ा जब सुब्रमण्यम स्वामी के पॉडकास्ट वाले बयान के बाद किश्वर ने उनके आरोपों का समर्थन किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किश्वर ने कहा कि प्रधानमंत्री के करीबी लोगों से ऐसी बातें सुनने के कारण वह दूरी बनाए रखती थीं। उनके आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है। वहीं इधर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बहरहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा में है। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कोई आधिकारिक जांच या सरकारी बयान अभी तक सामने नहीं आया।
मधु पूर्णिमा किश्वर ने पीएम मोदी के संबंध में एक्स पर पिछले कुछ दिनों में सिलसिलेवार कई पोस्ट किये। अपने पोस्ट में उन्होंने पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी के आईटी सेल से प्रमुख अमित मालवीय का जिक्र किया है और यह बताया है कि क्यों इन्हें महत्वपूर्ण पद दिये गये।
कौन हैं मधु पूर्णिमा किश्वर
मधु पूर्णिमा किश्वर पेशे से प्रोफेसर, लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता और कमेंटेटर हैं। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी (मिरांडा हाउस) और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से जुड़ी रही हैं। वह मानुसी नामक महिला और समाज से जुड़ी चर्चित जर्नल की सहसंस्थापक हैं। उनका संबंध CSDS से भी रहा है। वह भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) में भी प्रोफेसर रही हैं। उन्हें 1985 में चमेली देवी जैन अवॉर्ड भी मिला था। 1970–80 के दशक में महिला अधिकार, दहेज, सामाजिक सुधार और जेंडर मुद्दों पर सक्रिय रहीं। उन्होंने मानुसी जर्नल के जरिए महिला आंदोलन और सामाजिक बहसों में बड़ा योगदान दिया। बाद के वर्षों में राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर खुलकर लिखने और बोलने के कारण अक्सर विवादों में रहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में 'मोदीनामा' जैसी किताब भी लिखी थी।