हैदराबादः शीर्ष माओवादी तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी है और उसका आत्मसमर्पण प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए एक झटका माना जा सकता है।
माना जाता है कि देवजी (62) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माओवादी (भाकपा-माओवादी)के दिवंगत महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु का स्थान लिया था, जिसकी मई 2025 में मृत्यु हो गई थी। अधिकारी ने बताया कि एक शीर्ष माओवादी मल्ला राजी रेड्डी और भाकपा (माओवादी)के कई कार्यकर्ताओं ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।
ताजा खबरों के अनुसार, देवजी ने तेलंगाना के मुलुगु जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उनके साथ लगभग 16-20 अन्य सशस्त्र कैडरों के भी आत्मसमर्पण की खबरें हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी इसकी औपचारिक पुष्टि और विस्तृत घोषणा होना बाकी है।
अधिकारी ने बताया कि इन माओवादियों का आत्मसमर्पण केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए निर्धारित मार्च 2026 की समय सीमा से कुछ दिन पहले हुआ है।
उन्होंने पीटीआई से कहा, “कुछ दिनों में आत्मसमर्पण करने वालों को आधिकारिक तौर पर जनता के सामने लाया जाएगा ...वे तेलंगाना पुलिस के साथ हैं।’’ खबरों के अनुसार, देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था और भाकपा (माओवादी) के प्रमुख केंद्रीय समिति सदस्य और माओवादी पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बना था।
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी ने 15 फरवरी को राज्य के लगभग 15 बचे हुए चरमपंथियों सहित सभी भूमिगत भाकपा (माओवादी) पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से हथियार डालने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि जो लोग मुख्यधारा में शामिल होने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ‘‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना’’ के तहत तत्काल सहायता और लाभ प्रदान किए जाएंगे। रेड्डी ने पहले कहा था कि पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस के निरंतर प्रयासों से विभिन्न स्तरों के 588 माओवादी सामान्य जीवन में लौट आए हैं।
कौन हैं देवजी
तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक शीर्ष नेता और वर्तमान महासचिव हैं। वह देश के सबसे वांछित माओवादी कमांडरों में से एक माने जाते हैं। 0उन्हें सितंबर 2025 में सीपीआई (माओवादी) का महासचिव नियुक्त किया गया था। उन्होंने नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की जगह ली, जो मई 2025 में सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे।
वह तेलंगाना के जगतियाल (पूर्व में करीमनगर) जिले के कोरुतला के रहने वाले हैं। वह मडिगा दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और संगठन के पहले दलित प्रमुख माने जाते हैं।
देवजी पर तेलंगाना सरकार द्वारा 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि कुछ रिपोर्टों में उन पर कुल 1 करोड़ रुपये तक का इनाम बताया गया है। महासचिव बनने से पहले, वह संगठन के केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी ) के प्रमुख और एक प्रमुख सैन्य रणनीतिकार थे।
वह 1980 के दशक की शुरुआत में क्रांतिकारी छात्र संघ (आरएसयू) के माध्यम से आंदोलन से जुड़े और पिछले 40 वर्षों से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उनका आत्मसमर्पण माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह संगठन के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले अब तक के सबसे उच्च पदस्थ नेता हैं जिन्होंने हथियार डाले हैं।