नई दिल्लीः केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल की वजह से बृहस्पतिवार को पूरे देश में बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य के साथ-साथ गैस और पानी आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। 12 फरवरी को होने वाली आम हड़ताल में अलग-अलग क्षेत्र के 30 करोड़ कामगारों के शामिल होने की उम्मीद है।
ट्रेड यूनियनों के एक समूह ने नौ जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था ताकि ‘‘केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और देश-विरोधी, कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों का विरोध’’ दिखाया जा सके। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने पीटीआई को बताया, ‘‘12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल की वजह से बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जलापूर्ति की सेवाओं पर असर पड़ेगा।’’
उन्होंने बताया कि सभी बैंक यूनियन हड़ताल में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उनका यूनाइटेड फ्रंट 27 जनवरी को पहले ही हड़ताल कर चुका है। हालांकि, एआईबीईए, एआईबीओए और बीईएफआई जैसी बैंक कामगार यूनियनें विरोध में हिस्सा लेंगी। इसके अलावा, कौर ने कहा कि खनन और गैस पाइपलाइन क्षेत्र पर भी इस आंदोलन का असर दिखने की उम्मीद है।
बीमा क्षेत्र के कर्मचारी इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की इजाज़त देने और नए श्रम कानून लागू करने के सरकार के फैसले का विरोध करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बड़ी संख्या में कर्मचारी विरोध में हिस्सा लेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार, ‘‘कम से कम 30 करोड़ करोड़ कामगार’’ हड़ताल में हिस्सा लेंगे, और करीब 600 जिलों पर इसका असर पड़ने की उम्मीद है।
पिछले साल नौ जुलाई को हुई इसी तरह की हड़ताल में, करीब 25 करोड़ कामगारों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था, जिसका असर करीब 550 से ज़्यादा जिलों पर पड़ा था। कौर के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में श्रम आयुक्तों ने अपने मुद्दों पर बात करने के लिए यूनियन नेताओं के साथ बैठक बुलाई है, लेकिन बृहस्पतिवार का आंदोलन फोरम की योजना के मुताबिक ही चलेगा।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष, शैलेंद्र दुबे ने कहा कि देश भर में करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 12 फरवरी को एक दिन की हड़ताल करेंगे। यह हड़ताल निजीकरण, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025, प्रस्तावित राष्ट्रीय बिजली नीति 2026 और बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने के विरोध में बुलाई गई है। दुबे ने कहा कि पहली बार, संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केन्द्रीय ट्रेड यूनियन बिजली कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए हड़ताल में शामिल हो रहे हैं।