नई दिल्लीः केंद्र सरकार द्वारा रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश आम बजट में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए 3.09 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 2.87 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से लगभग आठ प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय परिवहन एव राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पहले ही कह चुके हैं कि देश में सड़कों का जाल बिछाने के लिए पैसे की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के लिए आवंटन को पिछले वर्ष के 1.70 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.87 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एनएचएआई मार्च में समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में अपने ऋण को दो लाख करोड़ रुपये से नीचे लाने की योजना बना रहा है।
एनएचएआई की ऋण देनदारी 2021-22 में 3.5 लाख करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, 31 दिसंबर, 2025 तक, यह घटकर 2.35 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।
विधि मंत्रालय को मतदाता पहचान पत्रों के लिए मिले 250 करोड़
भारत में मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बीच केंद्रीय बजट 2026-27 में विधि मंत्रालय को मतदाता पहचान पत्रों के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि लोकसभा चुनाव से संबंधित खर्चों को निपटाने के लिए 500 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं।
मतदाता फोटो पहचान पत्रों (ईपीआईसी) पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्यों के बीच बराबर बांटा जाता है। प्रत्येक राज्य अपने मतदाताओं की संख्या के अनुपात में राशि का भुगतान करता है। भारत में मतदाताओं की संख्या वर्तमान में लगभग 99 करोड़ है।
केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, संशोधित अनुमानों के तहत 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बजट अनुमानों के अनुसार, यह राशि 300 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा निर्वाचन आयोग, चुनाव कानूनों, संबंधित नियमों और निर्वाचन आयोग की नियुक्तियों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने वाले विधि मंत्रालय को 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के लिए 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी चुनाव के बाद विभिन्न एजेंसियों और राज्यों द्वारा इस उद्देश्य के लिए किए गए खर्चों को पूरा करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।