नई दिल्लीः क्रिप्टो मार्केट में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) ने सख्त नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए नए 'धनशोधन रोधी' और 'अपने ग्राहक को जाने' दिशानिर्देशों के तहत ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक मौजूदगी की जांच और जियो-टैगिंग जैसे नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं।
इस महीने आठ तारीख को जारी इन ताजा दिशानिर्देशों के अनुसार क्रिप्टो एक्सचेंजों को 'आभासी डिजिटल संपत्ति' (वीडीए) सेवा प्रदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अब इन्हें सिर्फ दस्तावेजों के अपलोड से आगे बढ़कर गहन जांच का सामना करना पड़ेगा।
इसके तहत उपयोगकर्ताओं को अब एक 'सजीव सेल्फी' लेनी होगी। इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा, जो यह पुष्टि करेगा कि व्यक्ति खुद वहां मौजूद है। इसमें पलक झपकाने या सिर हिलाने को कहा जाएगा। यह कदम फोटो या 'डीपफेक' के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
कई शर्तें करनी होंगी पूरी
खाता बनाते समय उपयोगकर्ता किस स्थान (अक्षांश और देशांतर), तारीख, समय और किस आईपी एड्रेस का उपयोग कर रहा है, इसका सटीक रिकॉर्ड भी रखना होगा। बैंक खाते की सक्रियता और स्वामित्व साबित करने के लिए मात्र एक रुपये का लेनदेन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत पैन कार्ड के साथ ही आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसा दूसरा पहचान पत्र देना होगा। साथ ही ईमेल और फोन नंबर का ओटीपी वेरिफिकेशन भी जरूरी है।
भारत में कितना हैं क्रिप्टो निवेशक
माना जाता है कि 2025 में भारत में क्रिप्टो कारोबार में निवेशकों की संख्या बढ़कर 19 मिलियन (1.9 करोड़) से ज्यादा हो गई, जिनमें युवा (18-35 वर्ष) प्रमुख है। मुख्य रूप से बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में निवेश हुआ, जबकि सरकार ने नियामक ढांचे को मजबूत किया और 30% टैक्स व 1% TDS जैसे नियम जारी रहे, जिससे क्रिप्टो बाजार में वृद्धि के साथ-साथ नियामक अनुपालन भी बढ़ा। भारतीय एक्सचेंज बढ़े और Web3 स्टार्टअप्स में निवेश आया, लेकिन बिटकॉइन जैसी प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव और बढ़ी हुई निगरानी भी देखी गई।