गुवाहाटीः कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा पर अपने वीडियो के जरिये मुसलमानों के खिलाफ “नरसंहार भड़काने” का आरोप लगाया और पुलिस से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया।
गोगोई का परोक्ष तौर पर इशारा उस वीडियो की ओर था, जिसे अब डिलीट कर दिया गया है। वीडियो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की असम इकाई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया था। इसमें सरमा कथित तौर पर राइफल से निशाना साधते हुए और दो लोगों की तस्वीर पर गोली चलाते हुए दिख रहे थे, जिनमें से एक ने टोपी पहनी हुई थी और दूसरे ने दाढ़ी रखी हुई थी। कैप्शन में "पॉइंट-ब्लैंक शॉट" लिखा था।
गोगोई ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘असम के मुख्यमंत्री अपने वीडियो के जरिए मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार भड़का रहे हैं, सरमा द्वारा एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर इस तरह के घृणास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में पुलिस को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।’’
गोगोई ने संवाददाता सम्मेलन के बाद पीटीआई से कहा, ‘‘उन्होंने (सरमा) एक वीडियो प्रसारित किया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया, जिसमें साफ दिख रहा था कि वह कैसे मुसलमानों के नरसंहार को बढ़ावा दे रहे हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा ने एक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ ‘‘नफरती भाषण’’ दिया और मामला अदालत में चला गया। गोगोई का परोक्ष तौर पर इशारा 'मियां' के खिलाफ मुख्यमंत्री के हालिया बयानों की ओर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक वह सत्ता में हैं, समुदाय को ‘‘परेशानी’’ का सामना करना पड़ेगा।
‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन लोगों को आमतौर पर बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में पहचानते हैं। कांग्रेस नेता गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री लगातार यह दिखा रहे हैं कि वह इस पद के योग्य नहीं हैं। हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने अपराध किए हैं और जिनके लिए उन्हें इस पद से हटाया जाना चाहिए। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।”
संवाददाता सम्मेलन में गोगोई ने सरमा पर आरोप लगाया कि जब वह कांग्रेस में थे, तब वे “धर्मनिरपेक्ष” होने का दिखावा कर रहे थे। सरमा अगस्त 2015 में भाजपा में शामिल हुए थे।गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री अब हिंदुओं के बारे में बहुत बोलते हैं। अगर वह सच में उनके हिमायती हैं, तो उन्हें 24 घंटे के भीतर गाय सिंडिकेट को रोकना चाहिए।”