NDA से निकलीं पहली महिला अधिकारी, भारतीय सैन्य इतिहास में दर्ज हुआ नया अध्याय 
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NDA के इतिहास में पहली बार बेटियों ने रचा स्वर्णिम अध्याय, सेना और वायुसेना में बनीं अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चार साल बाद 14 महिला कैडेट्स ने पूरी की कठिन सैन्य ट्रेनिंग, IMA और एयर फोर्स अकादमी की पासिंग आउट परेड में मिला कमीशन

देहरादून/हैदराबाद। भारतीय सैन्य इतिहास में शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण प्राप्त पहली महिला कैडेट्स ने भारतीय सेना और वायुसेना में अधिकारी बनकर नई इबारत लिख दी। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और हैदराबाद की एयर फोर्स अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के साथ 14 महिला कैडेट्स ने अपने सैन्य करियर की औपचारिक शुरुआत की। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि NDA में महिलाओं की एंट्री सुप्रीम कोर्ट के 2021 के ऐतिहासिक फैसले के बाद ही संभव हो सकी थी।

पहली बार बेटियों ने पार किया ‘अंतिम पग’

IMA के 94 वर्षों के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेट्स के साथ कदमताल करते हुए ‘अंतिम पग’ पार किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। देहरादून में आयोजित समारोह में NDA के पहले महिला बैच की नौ कैडेट्स भारतीय थलसेना में कमीशन हुईं, जबकि हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी से पांच महिला कैडेट्स भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनीं।

746 कैडेट्स बने अधिकारी

दोनों सैन्य संस्थानों में आयोजित पासिंग आउट परेड में कुल 746 कैडेट्स को कमीशन मिला। इनमें IMA से 515 जेंटलमैन और महिला कैडेट्स पास आउट हुए, जबकि एयर फोर्स अकादमी से 231 फ्लाइट कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर अधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली।

IMA से पास आउट होने वाले 515 कैडेट्स में 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी शामिल रहे। वहीं एयर फोर्स अकादमी में 194 पुरुष और 37 महिला फ्लाइट कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें NDA के पहले महिला बैच की पांच कैडेट्स भी शामिल थीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुला रास्ता

वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को NDA में प्रवेश देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसके बाद अगस्त 2022 में पहली बार महिला कैडेट्स ने NDA में प्रवेश लिया। तीन वर्षों के कठिन सैन्य प्रशिक्षण और स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद इनमें से 14 कैडेट्स ने सेना और वायुसेना में अधिकारी बनने का रास्ता चुना। एक वर्ष की अतिरिक्त विशेष ट्रेनिंग के बाद अब वे औपचारिक रूप से सैन्य अधिकारी बन गई हैं।

राष्ट्रपति बोलीं- यह सिर्फ अकादमी नहीं, देश के लिए भी ऐतिहासिक क्षण

IMA की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार नौ महिला कैडेट्स का सैन्य अधिकारी के रूप में पास आउट होना देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि नेतृत्व केवल आदेश देने का नाम नहीं, बल्कि चरित्र, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी परिचायक होता है। उन्होंने नए अधिकारियों से देश की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

‘भारत माता, तेरी कसम...’ से गूंजा परेड ग्राउंड

पासिंग आउट परेड के दौरान जब कैडेट्स ने जोशीले कदमों के साथ ड्रिल स्क्वायर पर मार्च किया तो पूरा वातावरण देशभक्ति के उत्साह से भर उठा। "भारत माता, तेरी कसम, तेरे रक्षक बनेंगे हम" के नारों के बीच कैडेट्स ने सैन्य जीवन की नई शुरुआत की। परेड ग्राउंड में मौजूद परिजनों की आंखों में गर्व और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी।

इन कैडेट्स को मिले प्रतिष्ठित सम्मान

परेड के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को विभिन्न सम्मान और पदक प्रदान किए गए।

  • ऑफिसर कैडेट विशाल कुमार को प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और गोल्ड मेडल मिला।

  • ऑफिसर कैडेट प्रिंस राज को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया।

  • ऑफिसर कैडेट तेजस भट्ट को ब्रॉन्ज मेडल मिला।

  • टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए ऋषभ मिश्रा को सिल्वर मेडल दिया गया।

  • स्पेशल कमीशन श्रेणी में बोधराज थापा को गोल्ड मेडल मिला।

  • बांग्लादेश के ऑफिसर कैडेट जैफ सदी अल्वी को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट का सम्मान प्रदान किया गया।

नए युग की शुरुआत

भारतीय सेना और वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी पहले भी रही है, लेकिन NDA के माध्यम से नियमित सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी एंट्री को एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सैन्य सेवाओं में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की लाखों बेटियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

देश की सैन्य परंपरा में यह दिन केवल 14 महिला अधिकारियों की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर है जहां बेटियां अब सीमाओं की रक्षा में भी अग्रिम पंक्ति में खड़ी दिखाई दे रही हैं।

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