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‘डिजिटल अरेस्ट’: एक करोड़ की धोखाधड़ी में पांच लोग गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस’ शाखा ने निजी बैंक के दो कर्मचारियों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार करने के बाद एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह का भंडाफोड़ किया।

नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस की ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस’ शाखा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति से लगभग एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में निजी बैंक के दो कर्मचारियों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार करने के बाद एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने कानून प्रवर्तन और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बनकर 80 वर्षीय पीड़ित को निशाना बनाया और उन्हें तथा उनकी पत्नी को सात दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। पुलिस ने बताया कि जालसाजों ने पहले बुजुर्ग से ‘व्हाट्सएप’ पर संपर्क किया, खुद को दूरसंचार और जांच एजेंसियों के अधिकारी बताया तथा झूठा दावा किया कि उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड अवैध गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित को अपनी सावधि जमा समय से पहले तुड़वा देने, अपनी पूरी बचत अंतरित कर देने और यहां तक कि सोने पर ऋण लेने के लिए मजबूर किया गया। आरोपियों ने उसे भरोसा दिलाया था कि तथाकथित सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बयान में कहा, ‘‘गिरोह ने उस व्यक्ति से 96 लाख रुपये की धोखाधड़ी की।’’ अधिकारी ने बताया कि पिछले साल चार नवंबर को आईएफएसओ थाने में ‘ई-एफआईआर’ दर्ज कराए जाने के बाद जांच की गई।

उन्होंने बताया कि आरोपियों में से एक प्रदीप कुमार (40) हरियाणा के हिसार में पाया गया और एक अन्य आरोपी नमनदीप मलिक (23) को भी हिसार से गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद, तीसरे आरोपी शशिकांत पटनायक (36) को ओडिशा के भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने बताया कि जांच में पश्चिमी दिल्ली स्थित एक निजी बैंक की शाखा के दो अधिकारियों – नीलेश कुमार (38) और चंदन कुमार (38) – की संलिप्तता का पता चला।

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